'मालदीव की मुहम्मद मुइज्जू सरकार को गिराने में असफल रहा इंडिया', वाशिंगटन पोस्ट ने भारत पर लगाया बड़ा आरोप

India Maldives Relation: वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट ने मालदीव में चल रही राजनीतिक घटनाओं और भारत की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि भारत सरकार ने इस साजिश को मंजूरी दी थी या नहीं.

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Gyanendra Tiwari

India Maldives Relation:  मालदीव के विपक्षी दल, मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के नेताओं ने इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को हटाने के लिए एक साजिश रची थी. यह साजिश 6 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 87 मिलियन मालदीवियन रूफिया) की राशि से जुड़ी थी, जो विपक्षी नेताओं द्वारा भारतीय मदद से जुटाने की कोशिश की जा रही थी. इस साजिश का विवरण वाशिंगटन पोस्ट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि मुइज्जू को हटाने की यह योजना असफल रही.

वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, इस योजना को "डेमोक्रेटिक रीन्युअल इनिशिएटिव" नामक एक आंतरिक दस्तावेज में विस्तार से बताया गया था. इस योजना के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने मालदीव की संसद के 40 सदस्य, जिनमें मुइज्जू की अपनी पार्टी, पीपल्स नेशनल कांग्रेस (PNC) के सदस्य भी शामिल थे, को रिश्वत देने की योजना बनाई थी. इसके साथ ही कुछ वरिष्ठ सैन्य और पुलिस अधिकारियों को भी रिश्वत देने का प्रस्ताव था.

भारत की भूमिका पर उठाए सवाल

यह दस्तावेज यह भी बताता है कि विपक्षी नेता भारत से इस योजना के लिए 6 मिलियन डॉलर की राशि प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे थे. रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि भारत की जासूसी एजेंसी, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के प्रतिनिधि जनवरी 2024 में मालदीव के विपक्षी नेताओं से मिलकर इस योजना पर विचार कर रहे थे. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि यह योजना संसद में पर्याप्त समर्थन हासिल करने में असफल रही, और इसे लागू करने की कोशिशों को विफलता का सामना करना पड़ा.

आरोपों पर विदेश मंत्रालय की नहीं आई कोई प्रतिक्रिया

भारत की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने अभी तक वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं की है. वहीं, मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भी इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि भारत कभी भी मालदीव के विपक्षी नेताओं को कोई दिशा-निर्देश नहीं देता है. नशीद ने ट्वीट किया, "भारत कभी भी इस तरह की साजिश का समर्थन नहीं करता, और हमेशा मालदीव के लोकतंत्र का समर्थन करता है."

मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद, मालदीव और भारत के रिश्तों में खटास आई थी, खासकर मुइज्जू के "इंडिया आउट" अभियान के कारण, जिसमें उन्होंने भारत के 80 से अधिक सैन्य कर्मचारियों को मालदीव से निकालने की मांग की थी.

भारत-मालदीव संबंधों में सुधार

हालांकि, मुइज्जू के भारत दौरे के बाद स्थिति में सुधार हुआ. अक्टूबर 2024 में, मुइज्जू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाए. मुइज्जू ने कहा था, "भारत मालदीव के सामाजिक-आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण साझेदार है और उसने हमारे मुश्किल समय में हमारा साथ दिया है."