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सिखाना था हमास को सबक अब खुद ही तबाह होता जा रहा इजरायल, जान लीजिए अर्थव्यवस्था की हकीकत

Israel Hamas War: इजरायल और हमास के बीच पिछले साल जंग शुरू हुई थी. इस जंग में अब तक हजारों फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है. इस दौरान इजरायल को जंग की कीमत चुकानी पुड़ी है. इजरायल को आर्थिक मोर्चे पर तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इजरायली वित्त मंत्रालय द्वारा जारी डेटा में कहा गया है कि देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 7.6 फीसदी हो गया है.

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India Daily Live

Israel Hamas War: इजरायल और हमास के बीच संघर्ष शुरू होने से पहले इजरायल की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में थी जिसने 2022 में 6.5% की वृद्धि दर्ज की थी.  हालाँकि हाल के दिनों में इजरायल की अर्थव्यवस्था को गाजा पट्टी में हमास के साथ जंग के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. इजरायली वित्त मंत्रालय ने हाल ही में डेटा जारी किया है जिससे पता चलता है कि देश का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 7.6% हो गया है. विश्लेषकों का कहना है कि यह वृद्धि हमास के साथ चल रहे संघर्ष और सरकार के बढ़ते खर्चों के कारण हुआ है. इजरायली सरकार बड़े पैमाने पर सैनिकों, विस्थापित निवासियों और प्रभावित व्यवसायों को फिर से उबारने पर खर्च कर रही है. 

इस साल मार्च माह में इजरायली सांसदों ने संशोधित 2024 राज्य बजट को अंतिम मंजूरी दे दी थी. इस बजट में  जो हमास के खिलाफ लड़ने में अरबों शेकेल देने की बात कही गई है. हालांकि जारी की गई  धनराशि महीनों से जारी जंग से हुई क्षति की भरपाई करने में सक्षम नहीं है.

अब तक हो चुका इतना नुकसान

इजरायल के वित्त मंत्रालय के अनुसार जून 2024 के अंत तक हमास के साथ चल रहे युद्ध से देश को 21.8 बिलियन अमरीकी डॉलर का नुकसान हो चुका है. यह अनुमान है कि इस साल की तीसरी तिमाही तक बजट घाटा और अधिक बढ़ जाएगा.  इजरायल के केन्द्रीय बैंक के गवर्नर अमीर यारोन ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक संघर्ष जारी रहेगा सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में गिरावट जारी रहेगी. इससे  आर्थिक विकास लक्ष्य और भी दूर होते जाएंगे.

हूती विद्रोहियों और हिजबुल्लाह का संकट 

हाल ही में हूती बलों ने लाल सागर में जहाजों पर कई हमले किए हैं जिसके कारण युद्ध से पहले देश का सबसे व्यस्त दक्षिणी बंदरगाह ईलाट अक्टूबर 2023 से लगभग बंद हो गया है. दूसरी ओर हिजबुल्लाह के साथ बढ़ते तनाव के कारण हजारों इजरायलियों को लेबनानी सीमा के निकट स्थित अपने समुदायों को खाली करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. कई मोर्चों पर जंग के कारण इजरायली निर्यात में भी कमी आई है. इजरायल से बड़ी मात्रा में आयात करने वाले विदेशी निवेशकों का उसकी स्थिति देखकर विश्वास डगमगा गया है. इजरायली वित्त मंत्रालय के अधिकारी चिंतित हैं कि विदेशी निवेश पूंजी में कमी से न केवल वित्तीय संसाधनों पर असर पड़ेगा बल्कि नई प्रौद्योगिकी, नवाचार और श्रम उत्पादकता तक पहुंच पर भी असर पड़ेगा. इसके अलावा मानव संसाधनों की कमी भी उन गंभीर परिणामों में से एक है जो संघर्ष के परिणामस्वरूप इजरायल की अर्थव्यवस्था को भुगतान करना होगा. 

केंद्रीय बैंक ने घटाई विकास दर 

गाजा में संघर्ष के कारण हजारों विदेशी कामगारों को इजरायल छोड़ना पड़ा है और सुरक्षा कारणों से पश्चिमी तट और गाजा पट्टी से फिलिस्तीनी कामगारों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. यह स्थिति इजरायली कृषि उद्योग को उसके इतिहास के सबसे बड़े मानव संसाधन संकट में डाल देती है. इजरायली मीडिया ने बताया कि 7 अक्टूबर 2023 से देश में लगभग 46,000 व्यवसायों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. इजरायल के केन्द्रीय बैंक ने हाल ही में 2024 और 2022 के लिए अपने आर्थिक विकास अनुमानों को घटाकर क्रमशः 1.5% और 4.2% कर दिया है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि यह संघर्ष अभी और समय तक चलेगा.  

सामान्य स्थिति आने में लगेगा लंबा समय 

इजरायल के केन्द्रीय बैंक के गवर्नर अमीर यारोन ने कहा कि बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता देश की अर्थव्यवस्था के लिए कई जोखिम लेकर आ सकती है. विश्लेषकों का कहना है कि गाजा पट्टी में लंबे समय से चल रहा संघर्ष इजरायल की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है. एक ठोस आधार होने और नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी स्थान रखने के बावजूद, इस मध्य पूर्वी देश की अर्थव्यवस्था को हमास के साथ युद्ध के परिणामों से सामान्य स्थिति में लौटने में लंबा समय लगेगा.