महाविनाश आने वाला है... 27 साल पहले किसने की थी भविष्यवाणी? अब हजारों मौतों से कांपा वेनेजुएला

वेनेजुएला में 24 जून को आए विनाशकारी भूकंप के बाद अब तक कम से कम 4 हजार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 30 हजार से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं.

Gemini
Reepu Kumari

वेनेजुएला में 24 जून को आए भीषण भूकंप ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस आपदा में अब तक कम से कम 4 हजार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं. बचाव दल लगातार मलबा हटाकर लोगों की तलाश में जुटे हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

इस त्रासदी के बीच 1999 से लगातार दी जा रही एक इंजीनियर की चेतावनी फिर चर्चा में आ गई है. उन्होंने कई बार कहा था कि जिस इलाके में निर्माण हो रहा है, वहां की जमीन और भूगर्भीय स्थिति भविष्य में बड़े भूकंप का कारण बन सकती है. हालांकि, उनके दावों पर अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई.

पुरानी चेतावनी फिर बनी चर्चा का विषय

वेनेजुएला के विज्ञान मंत्रालय में कार्यरत इंजीनियर जेंटेशन ने 1999 के बाद कई बार चेतावनी दी थी कि नरम जलोढ़ मिट्टी और सैन सेबस्टियन फॉल्ट के निकट होने के कारण यह इलाका भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है. उनके अनुसार, इमारतों में पड़ रही दरारें भविष्य के बड़े खतरे का संकेत थीं. उन्होंने लगभग दो दशकों में कई बार इस विषय पर आगाह किया.


मडस्लाइड के बाद भी जारी रहा निर्माण

1999 में ला गुएरा क्षेत्र में हुए मडस्लाइड में करीब 10 हजार लोगों की जान चली गई थी. इसके बाद पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ, लेकिन इंजीनियर जेंटेशन ने इस पर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि जिस जमीन पर निर्माण किया जा रहा है, वह स्थिर नहीं है और वहां भविष्य में गंभीर भूकंपीय खतरा बना रहेगा. इसी असहमति के चलते उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा भी दे दिया था.

मलबे में अपनों की तलाश जारी

भूकंप के कई दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है. मलबे से लगातार शव निकाले जा रहे हैं और उनकी पहचान की कोशिश की जा रही है. इसी दौरान रोसा लोपेज के 25 वर्षीय दामाद जोसे एंटोनियो टोलेडो का शव उस इमारत के मलबे से मिला, जहां वह सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रहे थे. अस्पताल में जगह नहीं मिलने के कारण शव को दूसरी जगह ले जाना पड़ा.

अंतिम संस्कार तक पहुंचना भी बना संघर्ष

परिजनों के लिए शव की पहचान के बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं. अंतिम संस्कार गृह द्वारा मांगी गई 450 अमेरिकी डॉलर की राशि परिवार के लिए जुटाना संभव नहीं था. बाद में महापौर कार्यालय की ओर से स्थानीय कब्रिस्तान में मुफ्त स्थान उपलब्ध कराने की सूचना मिली. इसके बाद रोसा लोपेज और उनकी बेटी रात में कब्रिस्तान पहुंचीं और जोसे एंटोनियो टोलेडो का अंतिम संस्कार किया.

पहचान में आ रही सबसे बड़ी चुनौती

फॉरेंसिक तकनीशियन जोएल मिराबाल पिछले सात दिनों से लगातार शवों की पहचान के कार्य में जुटे हैं. उनके अनुसार, कई मामलों में शवों की स्थिति इतनी खराब है कि पहचान करना बेहद कठिन हो गया है. कई परिजन टैटू, शरीर पर मौजूद निशानों या कपड़ों के आधार पर अपनों की पहचान कर रहे हैं. मिराबाल का कहना है कि हादसे के बाद कई शवों का स्वरूप इतना बदल चुका है कि पहचान की प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है.