US में जन्मे भारतीय बच्चों की नागरिकता को लेकर क्या कहता है वहां का कानून? जानें
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने वाले आदेश पर रोक बरकरार रखी है. चलिए जानते हैं क्या कहता है कानून.
नई दिल्ली: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने वहां रह रहे लाखों भारतीय परिवारों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी, जिसके जरिए जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने की कोशिश की गई थी.
अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत करीब 160 वर्षों से यह व्यवस्था लागू है कि अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला लगभग हर बच्चा जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक माना जाता है. यह नियम आमतौर पर माता-पिता की नागरिकता या उनके वीजा की स्थिति से प्रभावित नहीं होता.
इस फैसले का क्या पडे़गा असर?
इस फैसले के बाद फिलहाल अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को पहले की तरह अमेरिकी नागरिकता मिलती रहेगी, भले ही उनके माता-पिता अस्थायी वीजा पर रह रहे हों.
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डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश में क्या था?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश में प्रस्ताव था कि जिन लोगों के पास H-1B जैसे अस्थायी वीजा हैं या जो बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिका में रह रहे हैं, उनके अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं दी जाए. यदि यह आदेश लागू हो जाता तो बड़ी संख्या में भारतीय परिवार भी इससे प्रभावित हो सकते थे.
अभी कितने भारतीय है वहां?
अमेरिका में इस समय भारतीय मूल के लगभग 52 से 54 लाख लोग रहते हैं. इनमें बड़ी संख्या H-1B वीजा पर काम करने वाले आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय क्षेत्र के पेशेवरों की है. ऐसे परिवारों के लिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
हालांकि कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिलने का मतलब यह नहीं है कि उसके माता-पिता को भी स्वतः अमेरिकी नागरिकता या ग्रीन कार्ड मिल जाएगा. माता-पिता को अपने वीजा और कानूनी स्थिति के अनुसार ही अमेरिका में रहना होगा.
अमेरिकी इमिग्रेशन कानून में क्या है?
अमेरिकी इमिग्रेशन कानून के अनुसार अमेरिका में जन्मा नागरिक बच्चा अपने माता-पिता के लिए स्थायी निवास का आवेदन तभी कर सकता है, जब उसकी आयु कम से कम 21 वर्ष हो जाए.