Iran Israel tensions: 'जैसे मैंने भारत और PAK के साथ बीच समझौता कराया...', ट्रंप ने कहा कि इजरायल ईरान जल्द करेंगे डील!
तेहरान और इजरायल के बीच जारी तनाव मिडिल ईस्ट क्षेत्र में नए सिरे से युद्ध की आशंका को और बढ़ा रहा है. ऐसे में ट्रंप का ये बयान ईरान द्वारा अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को दी गई चेतावनी के जवाब में आया है, जिसमें तेहरान ने कहा था कि वे इजरायल की मदद करने से बचें.
Iran–Israel tensions: इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (15 जून) को दावा किया कि मध्य पूर्व के लंबे समय से दुश्मन रहे इन दोनों देशों के बीच "जल्द ही शांति" होगी. भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम कराने का दावा करते हुए ट्रंप ने कहा कि इजरायल और ईरान को समझौता करना चाहिए. ट्रंप ने कहा कि इजरायल और ईरान के बीच शांति जल्द ही होगी, जबकि तेहरान ने तेल अवीव पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर लिखा, "ईरान पर हुए हमले से अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है. ट्रंप ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की संभावना जताते हुए कहा, "हम ईरान और इजरायल के बीच आसानी से एक समझौता करा सकते हैं और इस संघर्ष को खत्म कर सकते हैं." यह बयान मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां इजरायल और ईरान एक-दूसरे पर हवाई हमले कर रहे हैं. ट्रंप का यह बयान क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.
ईरान को कड़ी चेतावनी
हाल ही में ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरान की ओर से अमेरिका पर किसी भी तरह का हमला होता है, तो अमेरिकी सेना इसका जवाब पूरी ताकत से देगी. उन्होंने अपने पोस्ट में जोर देकर कहा, "ऐसा जवाब जैसा पहले कभी नहीं देखा गया." यह बयान ईरान द्वारा अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को दी गई चेतावनी के जवाब में आया है, जिसमें तेहरान ने कहा था कि वे इजरायल की मदद करने से बचें.
जानिए क्या है इजरायल और ईरान के बीच तनाव?
बता दें कि, ईरान और इजरायल के बीच हाल के हफ्तों में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाइयां कर रहे हैं. ईरान ने इजरायल के हमलों के जवाब में मिसाइलें दागीं, जिसके बाद क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में ट्रंप का यह बयान न केवल अमेरिका की तटस्थता को दर्शाता है, बल्कि दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश भी है.