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'होर्मुज का तेल हमें नहीं चाहिए...जिसे चाहिए वो खुद बचाए', ईरान के साथ जंग के बीच ट्रंप का साफ संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की कोई जरूरत नहीं है. जिन देशों को इस मार्ग से तेल मिलता है, उन्हें खुद इसकी सुरक्षा करनी चाहिए.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि उनका देश होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाले तेल पर निर्भर नहीं है. उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जलडमरूमध्य जहाजों के लिए नहीं खोला गया तो परमाणु संयंत्रों पर हमला हो सकता है. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान ने अमेरिका समर्थित देशों के जहाजों को रास्ता रोक दिया है. इससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ रहा है. 

ट्रंप का सीधा संदेश

ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका होर्मुज से लगभग कोई तेल नहीं लेता. हमें इसकी जरूरत नहीं है. जो देश इस मार्ग से तेल लेते हैं, उन्हें इसका ध्यान रखना चाहिए. इसे संजोकर रखना चाहिए.' उनका यह बयान ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा लगता है. 

होर्मुज का वैश्विक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यहां से दुनिया के करीब 25 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है. भारत के लिए यह और भी अहम है क्योंकि देश की 80 प्रतिशत ऊर्जा जरूरत इसी रास्ते से पूरी होती है. बंदी से तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है.

ईरान की कार्रवाई और असर

ईरान ने हाल ही में होर्मुज को जहाजों के लिए बंद कर दिया है. खासकर अमेरिका और उसके समर्थक देशों के जहाज प्रभावित हुए हैं. रोजाना सैकड़ों कंटेनर जहाज, शुष्क मालवाहक और तेल टैंकर रुक गए हैं. इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर भारी दबाव पड़ रहा है और व्यापारिक गतिविधियां ठप होने लगी हैं. 

भारत और एशिया पर प्रभाव

भारत समेत कई एशियाई देश इस मार्ग पर पूरी तरह निर्भर हैं. तेल आयात में कोई रुकावट भारत की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बंदी बनी रही तो पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं. ट्रंप का बयान इन देशों के लिए भी संकेत है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्हें खुद उठानी होगी. 

ट्रंप की चेतावनी और ईरान की कड़ी कार्रवाई के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. दुनिया अब देख रही है कि यह विवाद कितना लंबा चलेगा और इससे ऊर्जा बाजार पर क्या असर पड़ेगा. फिलहाल जहाजों का आवागमन लगभग बंद है और कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं.