'वापस लौट जाओ वरना', होर्मुज पहुंचे US मिलिट्री के जहाजों को ईरानी सेना ने दी चेतावनी, सामने आया वीडियो

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में भारी सैन्य तनाव पैदा हो गया है. ईरान की भीषण चेतावनी के बावजूद अमेरिकी युद्धपोतों ने समुद्री रास्ता खोलने के लिए मिशन शुरू कर दिया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया की कूटनीति और सैन्य गतिविधियों में एक साथ उबाल देखने को मिला है. एक ओर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति बहाली के लिए उच्चस्तरीय वार्ता चल रही थी, तो दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूद की गंध गहरा गई थी. अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, समंदर की लहरों पर ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और अमेरिकी नौसेना के बीच हुआ यह टकराव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए किसी बड़े खतरे के संकेत की तरह उभरा है.

अमेरिकी नौसेना के दो गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाजों ने जब इस रणनीतिक मार्ग को पार करने की कोशिश की, तो ईरानी फाॅर्स (IRGC) ने उन्हें रेडियो संदेश के जरिए कड़ी चेतावनी दी. ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यह उनकी आखिरी चेतावनी है और जहाज तुरंत वापस लौट जाएं, अन्यथा उन्हें निशाना बनाया जा सकता है. इसके जवाब में अमेरिकी जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए शांतिपूर्वक आगे बढ़ने की बात कही और बिना किसी सीधे संघर्ष के इस संवेदनशील क्षेत्र को पार किया.

तेल मार्ग बहाली के लिए अमेरिकी मिशन 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवनरेखा है, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है. पिछले छह हफ्तों से बंद इस मार्ग को फिर से खोलने के लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 'यूएसएस फ्रैंक ई पीटरसन' और 'यूएसएस माइकल मर्फी' जैसे युद्धपोत तैनात किए हैं. ये जहाज पानी के भीतर चलने वाले हाईटेक ड्रोन्स की मदद से ईरान द्वारा बिछाई गई बेतरतीब बारूदी सुरंगों को हटाने का काम कर रहे हैं, ताकि वैश्विक व्यापार फिर से सुचारु हो सके.

ईरान के दावे और आर्थिक रणनीति 

जहां अमेरिका सुरंगों को हटाने की बात कर रहा है, वहीं ईरान का दावा है कि उसकी सेना ने अमेरिकी जहाजों को पीछे हटने पर मजबूर किया. दिलचस्प तथ्य यह भी है कि ईरान ने अब अपने जलक्षेत्र से गुजरने वाले हर जहाज के लिए 20 लाख डॉलर का भारी-भरकम टोल शुल्क प्रस्तावित किया है. यह मांग उसकी 10 सूत्रीय वार्ता शर्तों का अहम हिस्सा है. जानकारों का मानना है कि ईरान अपनी समुद्री पकड़ को आर्थिक लाभ और राजनीतिक दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.

इस्लामाबाद वार्ता का बेनतीजा अंत 

कूटनीतिक मोर्चे पर भी निराशा ही हाथ लगी है. इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी और जटिल बातचीत अंततः विफल हो गई. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिका के 'अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव' को ठुकरा दिया है. दूसरी ओर, ईरान ने विफलता का दोष अमेरिका की सख्त शर्तों पर मढ़ दिया है. संवाद की इस नाकामी ने पश्चिम एशिया में शांति की संभावनाओं को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है और तनाव चरम पर पहुंचा दिया है.