अमेरिका-ईरान शांति समझौता करीब, होर्मुज फिर खुलने की संभावना! लेकिन न्यूक्लियर बना परेशानी...
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. वाशिंगटन और तेहरान का कहना है कि बातचीत अच्छी दिशा में बढ़ रही है. चलिए जानते हैं दोनों देशों के बीच क्या-क्या बातचीत चल रही है.
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तीन महीने से ज्यादा समय से चला आ रहा तनाव अब खत्म होने की ओर है. दोनों देश शांति समझौते को लेकर काफी पॉजिटिव नजर आ रहे हैं. वाशिंगटन और तेहरान का कहना है कि बातचीत अच्छी दिशा में बढ़ रही है. हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर अभी भी कुछ मतभेद बाकी हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हफ्ते कहा कि शांति समझौता लगभग तैयार हो चुका है. इसे इस वीकेंड यूरोप में साइन किया जा सकता है. उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका की तरफ से इस समझौते में शामिल होंगे.
ईरान का बयान:
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि शांति समझौता पहले से कहीं ज्यादा करीब है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग अब कभी भी पूरा हो सकता है. उन्होंने मीडिया से अपील की कि अभी इसके बारे में अनुमान न लगाएं. सारी जानकारी समय पर जनता के सामने रखी जाएगी.
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न्यूक्लियर कार्यक्रम पर विवाद:
ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान इस समझौते में परमाणु हथियार बनाने का कार्यक्रम छोड़ देगा. व्हाइट हाउस के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि ईरान का समृद्ध यूरेनियम नष्ट किया जाएगा और देश से बाहर ले जाया जाएगा. यह अमेरिका के लिए बहुत जरूरी है.
लेकिन ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कहा कि न्यूक्लियर मुद्दे पर बात तब तक नहीं होगी जब तक अंतरिम समझौता लागू न हो जाए. अगर शर्तें पूरी नहीं हुईं तो ईरान समझौते से पीछे हट सकता है. समझौता साइन होने के बाद अमेरिका को 60 दिन का समय मिलेगा.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर सहमति:
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच बेहतर समझ बनी नजर आ रही है. ट्रंप ने कहा कि समझौता होते ही यह अहम जलमार्ग खोल दिया जाएगा. ईरान ने कहा कि वह जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा लेकिन इस क्षेत्र पर अपना संप्रभु अधिकार भी बनाए रखेगा. यह समझौता पूरा होने पर मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.