अमेरिका-ईरान शांति समझौता तैयार, लेकिन ट्रंप का एक फैसला बदल सकता है पूरा खेल
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के नाजुक सीजफायर को बढ़ाने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए शुरुआती सहमति बन गई है जिसे अंतिम मंजूरी के लिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा गया है.
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआती सहमति बनने की खबर है. दोनों देश इस नाजुक सीजफायर को आगे बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए राजी हो गए हैं. हालांक इस प्रस्ताव को अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है और उम्मीद है कि वे अगले कुछ दिनों में इस पर अपना फैसला सुनाएंगे.
60 दिनों के एमओयू पर बनी थी सहमति
'एक्सियोस' की एक रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इसी हफ्ते 60 दिनों के एक एमओयू के मुख्य ढांचे पर सहमति बनी थी. अगर इस समझौते को मंजूरी मिल जाती है तो यह दोनों देशों के बीच लगभग तीन महीने पहले शुरू हुए सीधे सैन्य संघर्ष के बाद से अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक कामयाबी होगी. फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. बातचीत चलने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच रुक-रुक कर सैन्य झड़पें हो रही हैं जिससे आशंका बनी हुई है कि यह सीजफायर किसी भी वक्त टूट सकता है. इसी वजह से दुनिया भर के नेताओं की नजरें इन वार्ताओं पर टिकी हैं.
ट्रंप ने अब तक नहीं लगाई है मुहर
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि समझौते के ज्यादातर हिस्सों को मंगलवार तक अंतिम रूप दे दिया गया था. वहीं ईरानी वार्ताकारों ने भी मध्यस्थों को बताया है कि तेहरान के शीर्ष नेता इस प्रस्ताव पर सहमत हैं और आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इस डील पर आधिकारिक तौर पर मुहर नहीं लगाई है. एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप इस प्रस्ताव पर आखिरी फैसला लेने से पहले सोचने के लिए 'एक-दो दिन' का समय चाहते हैं. हालांकि व्हाइट हाउस ने अभी तक इस ड्राफ्ट समझौते की बातों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है. ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि शांति की संभावना तो है लेकिन एक कैबिनेट बैठक के दौरान उन्होंने बातचीत की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी भी जताई थी.
30 दिनों में हॉर्मुज में सामान्य होगा आवागमन
माना जा रहा है कि इस प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज जलडमरू मध्य से होने वाले व्यापारिक जहाजों के आवागमन को 30 दिनों के भीतर धीरे-धीरे सामान्य किया जा सकता है. यह रूट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार रास्तों में से एक है और यहां जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बुरा असर पड़ा है.
इसके बदले में अमेरिका ईरान के पास अपनी सैन्य गतिविधियों को थोड़ा कम कर सकता है और भविष्य के कूटनीतिक व आर्थिक कदमों पर चर्चा आगे बढ़ा सकता है. हालांकि ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका फिलहाल प्रतिबंधों को हटाने पर कोई बातचीत नहीं कर रहा है जो कि ईरान की सबसे मुख्य मांग रही है. आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होने वाले हैं क्योंकि पूरी दुनिया यह देखने का इंतजार कर रही है कि क्या ट्रंप इस समझौते को मंजूरी देकर क्षेत्र को एक बड़े संकट से बचाते हैं या नहीं.