ईरान में 300 अरब डॉलर निवेश का विवाद, कौन देगा पैसा? ट्रंप का दावा
300 अरब डॉलर को लेकर अभी भी कंफ्यूजन बरकरार है. अमेरिका और ईरान के बीच हुई डील में इसका जिक्र है, लेकिन यह पैसा दिया जाएगा या नहीं, लोगों का इस पर क्या कहना है, चलिए जानते हैं.
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए जो MoU साइन हुआ है, उसके छठे प्वाइंट में साफ लिखा है कि ईरान के पुनर्निर्माणके लिए 300 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा. लेकिन अब इस पैसे को लेकर भारी कन्फ्यूजन छाया हुआ है. लोग पूछ रहे हैं कि आखिर यह इतनी बड़ी रकम ईरान को कौन देगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पूरी कोशिश की कि अमेरिका के टैक्सपेयर्स का एक पैसा भी ईरान नहीं जाएगा. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट लिखा, “यह फेक न्यूज है. अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर नहीं दे रहा. अमेरिका को सिर्फ फायदा हो रहा है, सस्ता तेल और जीत. यह डेमोक्रेट्स का प्रोपेगैंडा है.”
जेडी वेंस का क्या है कहना:
जेडी वेंस ने भी कहा कि अमेरिका का एक भी डॉलर ईरान को नहीं जाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि यह पैसा क्षेत्रीय अरब देशों और दूसरे देशों से जुटाया जाएगा जो ईरान में निवेश करना चाहते हैं. वेंस ने यह भी कहा कि ईरान को पैसे तभी मिलेंगे जब वह डील की सारी शर्तें पूरी करेगा और अपना बर्ताव बदलेगा.
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डेमोक्रेट्स का हमला:
अमेरिका में विपक्षी डेमोक्रेट्स इस मुद्दे पर ट्रंप सरकार पर जमकर हमला बोल रहे हैं. सीनेटर एमी क्लोबुचर ने कहा, “300 अरब डॉलर से हम अपने देश में बेघरों की समस्या खत्म कर सकते हैं, कैंसर रिसर्च कर सकते हैं और बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे सकते हैं. लेकिन ट्रंप इसे ईरान दे रहे हैं.”
सीनेट में डेमोक्रेट्स के नेता चक शूमर ने कहा कि वे ईरान को इतना पैसा भेजने में ट्रंप की मदद नहीं करेंगे. एक अन्य सांसद जेसन क्रो ने भी ट्वीट कर कहा कि रिपब्लिकन्स अमेरिकियों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पैसे नहीं देते, लेकिन ईरान के लिए 300 अरब डॉलर निकाल लेते हैं.
रिपब्लिकन पार्टी में भी नाराजगी:
केवल डेमोक्रेट्स ही नहीं, ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेता भी इस प्लान से खुश नहीं हैं. सीनेटर रोजर विकर ने कहा कि भले ही अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा न लगे, लेकिन यह रकम 2015 की ओबामा डील (JCPOA) को बहुत छोटा बना देती है. उस डील में ईरान को करीब 55 अरब डॉलर की रुकी संपत्ति वापस मिली थी. ट्रंप ने 2018 में उस पुरानी डील से अमेरिका को बाहर निकाला था और अब दावा कर रहे हैं कि नया समझौता पुराने से कहीं बेहतर होगा.
अभी क्या होगा?
MoU के अनुसार, अगले 60 दिनों में बातचीत करके यह प्लान फाइनल किया जाएगा. अभी किसी भी देश ने 300 अरब डॉलर देने की पुष्टि नहीं की है.