पाकिस्तान में अब भी एक्टिव है आतंकी नेटवर्क...., अमेरिकी रिपोर्ट ने दुनिया के सामने खोली कंगाल पाक की पोल
अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान अब भी आतंकी संगठनों का सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है. भारत और कश्मीर को निशाना बनाने वाले कई बड़े संगठन वहां सक्रिय हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
हाल ही में कांग्रेस रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट ने एक बार फिर पाकिस्तान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अब भी कई आतंकी संगठनों का ठिकाना बना हुआ है, जो भारत खासकर जम्मू और कश्मीर को निशाना बना रहे हैं. 25 मार्च को जारी इस रिपोर्ट में करीब 15 आतंकी संगठनों का जिक्र किया गया है, जिनमें कई को अमेरिका पहले ही विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर चुका है.
रिपोर्ट में जिन संगठनों का नाम सामने आया है, उनमें लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन, हरकत उल जिहाद इस्लामी और हरकत उल मुजाहिदीन शामिल हैं. इन सभी संगठनों का मुख्य लक्ष्य भारत और कश्मीर क्षेत्र बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये समूह पाकिस्तान की जमीन से बिना रोक टोक अपनी गतिविधियां चला रहे हैं.
लश्कर और जैश की भूमिका पर चिंता
लश्कर ए तैयबा को लेकर रिपोर्ट में बताया गया कि यह संगठन अभी भी सक्रिय है और इसके पास हजारों लड़ाके मौजूद हैं. इसी तरह जैश ए मोहम्मद को भी भारत के खिलाफ प्रमुख खतरा बताया गया है. इस संगठन का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना बताया गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये संगठन अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से भी जुड़े हुए हैं.
पाकिस्तान की कार्रवाई पर उठे सवाल
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों को खत्म करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है. हालांकि वहां कई सैन्य अभियान और योजनाएं चलाई गईं, लेकिन इनका असर सीमित रहा. यह भी सामने आया कि कुछ धार्मिक संस्थानों में अब भी ऐसी विचारधाराएं सिखाई जा रही हैं, जो कट्टरता को बढ़ावा दे सकती हैं.
रिपोर्ट में पाकिस्तान को एक ऐसे देश के रूप में दिखाया गया है जो खुद भी हिंसा से जूझ रहा है और साथ ही आतंकी नेटवर्क को जगह भी दे रहा है. एक तरफ वहां आंतरिक समस्याएं हैं, तो दूसरी तरफ वही जमीन लंबे समय से भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो रही है.
भारत लगातार कहता रहा है कि क्षेत्र में शांति तभी संभव है जब सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह खत्म हो. अमेरिकी रिपोर्ट ने इस रुख को और मजबूत कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन नेटवर्क्स पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक क्षेत्र में तनाव बना रह सकता है.