टैरिफ पर ट्रंप की अग्निपरीक्षा टली, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई स्थगित; जानिए कब आएगा फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई टल गई है. यह मामला IEEPA कानून के तहत लगाए गए शुल्कों की वैधता से जुड़ा है, जिस पर वैश्विक अर्थव्यवस्था की नजरें टिकी हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विवादित टैरिफ नीति को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई फिलहाल टल गई है. इस सुनवाई को ट्रंप के लिए अब तक की सबसे बड़ी कानूनी और राजनीतिक अग्निपरीक्षा माना जा रहा था. अदालत को यह तय करना था कि ट्रंप प्रशासन ने International Emergency Economic Powers Act यानी IEEPA के तहत जिन टैरिफों को लागू किया, वे अमेरिकी कानून और संविधान के दायरे में आते हैं या नहीं. सुनवाई टलने से असमंजस की स्थिति और गहरी हो गई है.

यह मामला सिर्फ अमेरिका की आंतरिक नीति तक सीमित नहीं है. इसका असर वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है. ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए IEEPA कानून के तहत चीन, यूरोप और अन्य देशों से आने वाले कई उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए थे. प्रशासन का तर्क रहा है कि ये कदम अमेरिकी उद्योगों की रक्षा और व्यापार घाटा कम करने के लिए जरूरी थे.

विरोधियों ने क्या कहा?

विरोधियों का कहना है कि ट्रंप ने IEEPA जैसे आपातकालीन कानून का दुरुपयोग किया. यह कानून मूल रूप से युद्ध, आतंकवाद या गंभीर राष्ट्रीय संकट की स्थिति में आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए बनाया गया था, न कि नियमित व्यापारिक फैसलों के लिए. याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना अपनी शक्तियों का जरूरत से ज्यादा विस्तार किया.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी थी करोड़ों लोगों की नजरें

आज होने वाली सुनवाई में कोर्ट को यह भी देखना था कि क्या राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने के लिए इतनी व्यापक स्वतंत्रता दी जा सकती है या फिर व्यापार नीतियों पर अंतिम अधिकार कांग्रेस के पास होना चाहिए. यही वजह है कि इस फैसले को अमेरिकी सत्ता संतुलन की कसौटी भी माना जा रहा था. अगर कोर्ट ट्रंप के पक्ष में जाता, तो भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति के लिए आपातकाल का हवाला देकर टैरिफ लगाना आसान हो जाता.

निवेशकों और कारोबारियों को उम्मीद को झटका

सुनवाई टलने से बाजारों में भी बेचैनी देखी गई. निवेशकों और कारोबारियों को उम्मीद थी कि कोर्ट का फैसला व्यापारिक अनिश्चितता को कुछ हद तक खत्म करेगा. लेकिन अब फैसले में देरी से कंपनियों की योजना, निवेश और आयात-निर्यात रणनीतियां प्रभावित हो सकती हैं. कई अमेरिकी उद्योग पहले ही ऊंचे टैरिफ के कारण लागत बढ़ने और सप्लाई चेन बाधित होने की शिकायत कर चुके हैं.

वैश्विक स्तर पर भी इस मामले पर करीबी नजर रखी जा रही है. चीन, यूरोपीय संघ और अन्य व्यापारिक साझेदार यह जानना चाहते हैं कि अमेरिका की अदालतें ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति को कितनी वैधता देती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला भविष्य की अमेरिकी व्यापार नीति की दिशा तय कर सकता है.

फिलहाल सुनवाई टलने से ट्रंप प्रशासन को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन कानूनी चुनौती खत्म नहीं हुई है. आने वाले दिनों में जब सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा, तब उसका फैसला न सिर्फ ट्रंप के राजनीतिक भविष्य, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर भी गहरा असर डाल सकता है.