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India Daily

तेल की बढ़ती कीमतों का 'विलेन' कौन? US एनर्जी चीफ ने सट्टेबाजों और 'डर' को ठहराया जिम्मेदार; रूसी तेल पर ढील का किया बचाव

ईरान युद्ध के चलते बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल पर प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है. अधिकारियों का मानना है कि ईंधन के दामों में यह उछाल केवल कुछ ही हफ्तों तक रहेगा.

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तेल की बढ़ती कीमतों का 'विलेन' कौन? US एनर्जी चीफ ने सट्टेबाजों और 'डर' को ठहराया जिम्मेदार; रूसी तेल पर ढील का किया बचाव
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: ईरान के साथ जारी युद्ध के दूसरे सप्ताह में अमेरिकी जनता पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों से परेशान है. इस आर्थिक दबाव को कम करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ अधिकारियों ने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने के फैसले का जोरदार बचाव किया है. ऊर्जा सचिव क्रिस राइट और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज का कहना है कि भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने से वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति का संकट काफी हद तक दूर होगा.

राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट किया कि रूसी तेल पर दी गई यह 30 दिनों की छूट एक व्यावहारिक और तर्कसंगत कदम है. उनके अनुसार वर्तमान में जहाजों पर लाखों बैरल तेल बेकार पड़ा है, जिसे भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचना बाजार के संतुलन के लिए जरूरी है. यह फैसला बाजार में तेल की कमी के डर को कम करने और अचानक बढ़ी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए लिया गया है. अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता में सुधार होगा.

आम जनता पर कीमतों की मार 

ईरान युद्ध के चलते अमेरिका में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक नियमित गैसोलीन की औसत कीमत पिछले सप्ताह की तुलना में 11 प्रतिशत बढ़कर 3.32 डॉलर प्रति गैलन हो गई है. वहीं डीजल की कीमतों में भी 15 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया है. यह सितंबर 2024 के बाद की सबसे ऊंची दर दर्ज की गई है. ईंधन की इस महंगाई ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां और जटिलताएं पैदा कर दी हैं.

अस्थायी संकट का दावा 

ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने तेल व्यापारियों और सट्टेबाजों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है. उनका तर्क है कि बाजार में तेल या प्राकृतिक गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है. कीमतों में यह वृद्धि केवल इस 'डर और धारणा' पर आधारित है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान लंबा खिंच सकता है. हालांकि  राष्ट्रपति ट्रंप ने भविष्यवाणी की है कि यह युद्ध महीनों के बजाय केवल कुछ हफ्तों में ही समाप्त हो जाएगा और इसके बाद ईंधन की कीमतें बहुत तेजी से नीचे गिरेंगी.

आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव 

ईंधन की कीमतों में यह निरंतर वृद्धि रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक जोखिम भी पैदा कर रही है. आगामी मिडटर्म चुनावों में अमेरिकी कांग्रेस पर नियंत्रण दांव पर लगा है और बढ़ती महंगाई मतदाताओं के मूड को प्रशासन के खिलाफ मोड़ सकती है. हालिया पोल बताते हैं कि अधिकांश अमेरिकी नागरिक अर्थव्यवस्था को 'बेहतर' बताने वाले ट्रंप के दावों से सहमत नहीं हैं. इसके अलावा फरवरी महीने में 92,000 नौकरियों का जाना भी प्रशासन के लिए चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है.