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शंखनाद, मंत्रोच्चार और 108 बटुकों के साथ सत्ता संभालेंगे बालेन्द्र शाह; रामनवमी पर होगा 'राज्याभिषेक'

नेपाल में बालेन्द्र शाह का प्रधानमंत्री पद के लिए शपथ ग्रहण समारोह रामनवमी के शुभ अवसर पर आयोजित होगा. यह ऐतिहासिक कार्यक्रम अयोध्या के राम मंदिर उत्सव के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का संगम बनेगा.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: हिमालय की गोद में बसे नेपाल के राजनीतिक गलियारों में एक नया और गौरवशाली अध्याय जुड़ने जा रहा है. पिछले साल के 'जेन जेड' आंदोलन की लहर ने देश की सत्ता की बुनियाद हिला दी थी और बालेन्द्र शाह इस बदलाव के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे. अब वह नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं. यह शपथ ग्रहण समारोह मात्र एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नेपाल की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और आधुनिकता के मिलन का प्रतीक है.

बालेन्द्र शाह के शपथ ग्रहण के लिए शुक्रवार का दिन और चैत्र नवरात्रि की रामनवमी तिथि चुनी गई है. स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजकर 44 मिनट का समय तय किया गया है. जो बेहद खास है. ठीक इसी समय भारत के अयोध्या में भगवान राम की विशेष पूजा की जा रही होगी. इस अद्भुत संयोग को पंचांग और शुभ नक्षत्रों को ध्यान में रखकर तय किया गया है, ताकि देश में नई शुरुआत मंगलकारी हो और सांस्कृतिक जुड़ाव बना रहे.

'जेन जेड' आंदोलन का राजनीतिक फल 

नेपाल में बीते वर्ष युवाओं के नेतृत्व में चले 'जेन जेड' आंदोलन ने पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया, जिसके कारण तत्कालीन चुनी हुई सरकार को भंग करना पड़ा था. नए चुनावों में जनता ने बालेन्द्र शाह की दूरदर्शिता और ऊर्जा पर भरोसा जताया. युवाओं की आवाज बनकर उभरे बालेन्द्र अब नेपाल की सत्ता की बागडोर संभालने जा रहे हैं. उनका यह ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह देश की जनता के लिए नई उम्मीदों और लोकतान्त्रिक शक्ति का एक बड़ा संदेश लेकर आया है.

मंत्रों और शंखनाद से गूंजेगा हिमालय 

इस समारोह की तैयारी किसी प्राचीन राज्याभिषेक जैसी की गई है. शीतल निवास में शपथ के समय 7 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा शंखनाद किया जाएगा. जिससे पूरा वातावरण वैदिक ऊर्जा से भर उठेगा. इसके साथ ही 108 हिन्दू बटुक स्वस्ति वाचन करेंगे. जो शांति और मंगल की कामना का प्रतीक है. घंटों और घड़ियालों की आवाज के बीच होने वाला यह वैदिक अनुष्ठान नेपाल की सनातनी पहचान को दुनिया के सामने नए सिरे से प्रस्तुत करेगा और माहौल को भक्तिमय बनाएगा.

बहुधार्मिक एकता की सुंदर मिसाल 

बालेन्द्र शाह का यह शपथ ग्रहण नेपाल की विविधता और बहुसांस्कृतिक पहचान का उत्सव है. जहां एक ओर हिन्दू परंपराओं का पालन होगा, वहीं दूसरी ओर 107 बौद्ध लामा गुरु विशेष मंगल पाठ करेंगे. हिन्दू और बौद्ध रीति-रिवाजों का यह मेल नेपाल की सदियों पुरानी धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाता है. यह आयोजन यह संदेश देता है कि नई सरकार सभी पंथों और समुदायों को साथ लेकर विकास के पथ पर आगे बढ़ने और राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.