US Israel Iran War

इजरायल पर गिरी 'भारत के लोगों का शुक्रिया' संदेश लिखा ईरानी मिसाइल, जानिए क्या है पूरा मामला?

ईरान ने इजरायल पर हमलों के दौरान भारत और अन्य सहयोगी देशों का अनोखे अंदाज में आभार व्यक्त किया है. मिसाइलों पर लिखे संदेशों और रूसी हस्तक्षेप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस युद्ध को नया मोड़ दे दिया है.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है. डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हमलों में कुछ समय के लिए ढील देने के बावजूद ईरान का आक्रामक रुख कम नहीं हुआ है. इसी बीच, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनूठा और चौंकाने वाला तरीका अपनाया है. उसने भारत सहित उन देशों का शुक्रिया अदा किया है जिन्होंने युद्ध के इस कठिन समय में उसके प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा है.

सोशल मीडिया पर हाल ही में कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें ईरान की मिसाइलों पर 'भारत के लोगों का शुक्रिया' संदेश लिखा हुआ है. ईरान की इस्लामिक रेवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इजरायल के सैन्य ठिकानों पर अपने 83वें हमले को अंजाम दिया. सफेद रंग की इन मिसाइलों के जरिए ईरान ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह अपने दोस्तों को नहीं भूला है. इस कूटनीतिक कदम ने भारत के साथ ईरान के संबंधों की गहराई को एक नए वैश्विक मंच पर उजागर किया है.

युद्ध की तीव्रता और अन्य देशों का आभार 

ईरान ने केवल भारत ही नहीं बल्कि जर्मनी, पाकिस्तान और स्पेन जैसे देशों को भी मिसाइलों के माध्यम से धन्यवाद कहा है. शुक्रवार को हुए हमलों में लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों के साथ-साथ उन्नत ड्रोन्स का भी प्रयोग किया गया. ईरानी सेना का दावा है कि उसने इजरायल की महत्वपूर्ण सैन्य सुविधाओं को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है. यह युद्ध केवल हथियारों का नहीं बल्कि उन अंतरराष्ट्रीय संदेशों का भी है जो मिसाइलों के ऊपर लिखकर पूरी दुनिया को भेजे जा रहे हैं.

अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर प्रहार 

ईरानी समाचार एजेंसियों के अनुसार, बहरीन में स्थित अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की मेंटेनेंस फैसिलिटी पर भी हमला किया गया है. 28 फरवरी से जारी यह जंग ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद और भी भीषण हो गई है. ईरान अब न केवल इजरायल बल्कि कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर भी मिसाइलें दाग रहा है. ईरान का लक्ष्य इस क्षेत्र से अमेरिकी प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करना और अपनी संप्रभुता को साबित करना है.

ट्रंप की घोषणा और रणनीतिक ठहराव 

पिछले दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों को कुछ समय के लिए रोकने का ऐलान किया है जिससे रणनीतिकार हैरान हैं. अगले दस दिनों तक अमेरिका ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर कोई हमला नहीं करेगा. अमेरिका और इजरायल को यह आशा थी कि ईरान में जल्द ही सत्ता परिवर्तन हो जाएगा, लेकिन हकीकत में ईरान ने अपनी पकड़ और भी मजबूत कर ली है. ट्रंप के पीछे हटने के इस फैसले को युद्ध की तीव्रता कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि ईरान अभी भी शांत नहीं है.

रूस का हस्तक्षेप और सुरक्षा परिषद की बैठक 

युद्ध के बढ़ते मानवीय संकट को देखते हुए रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से बंद कमरे में चर्चा का अनुरोध किया है. रूसी प्रवक्ता येवगेनी उस्पेंस्की के मुताबिक, ईरान के शैक्षणिक और स्वास्थ्य केंद्रों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं. शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मानक समय के अनुसार 14:00 बजे इस मुद्दे पर गहन विमर्श होगा. रूस का यह कदम ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवीय आधार पर समर्थन दिलाने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है.