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टूट गया शांति समझौता? कुछ ही घंटों बाद ईरान ने बंद किया होर्मुज! दुनिया की टेंशन बढ़ी

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया शांति समझौते के बाद एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है. लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई जारी रहने से नाराज ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर बंद करने का ऐलान किया है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और समझौते की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद नया विवाद खड़ा हो गया. ईरान ने आरोप लगाया है कि समझौते की अहम शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है. खास तौर पर लेबनान में इजरायली सैन्य अभियान जारी रहने और क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी को लेकर तेहरान ने कड़ी आपत्ति जताई है. इसी के चलते ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, को फिर से बंद करने का फैसला किया है.

समझौते के बाद क्यों भड़का ईरान?

ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे, जिनमें लेबनान से इजरायली सेना की वापसी, क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी का अंत और फारस की खाड़ी से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को कम करना शामिल था. ईरानी नेतृत्व का आरोप है कि इन शर्तों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई. इसी वजह से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि जब तक समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया जाएगा, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा. ईरान इस कदम को अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है.

लेबनान में जारी संघर्ष बना विवाद की जड़

तनाव की सबसे बड़ी वजह लेबनान में जारी सैन्य गतिविधियां हैं. इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपना अभियान फिलहाल बंद नहीं करेगा. इजरायली नेतृत्व का तर्क है कि सीमा क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य मौजूदगी जरूरी है. हाल के दिनों में हुए हमलों और जवाबी कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है, जबकि दोनों पक्षों को नुकसान उठाना पड़ा है. इन घटनाओं ने युद्धविराम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ईरान का मानना है कि लेबनान में जारी कार्रवाई सीधे तौर पर समझौते की भावना के खिलाफ है.


ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बढ़े मतभेद

इस पूरे घटनाक्रम का असर अमेरिका और इजरायल के रिश्तों पर भी दिखाई देने लगा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए सैन्य अभियानों को रोका जाना चाहिए. दूसरी ओर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने सुरक्षा दृष्टिकोण पर कायम हैं. दोनों नेताओं के बयानों में अंतर साफ नजर आ रहा है. अमेरिकी प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि केवल सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र की जटिल समस्याओं का समाधान संभव नहीं है. इससे कूटनीतिक दबाव और बढ़ गया है.

होर्मुज बंद होने से दुनिया की बढ़ी चिंता

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है. दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है. कई देशों को आशंका है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. भारत समेत ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की नजर भी इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है. फिलहाल दुनिया की बड़ी शक्तियां तनाव कम करने और समझौते को बचाने के लिए नए कूटनीतिक प्रयासों में जुटी हुई हैं.