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छोटी बेटी तिखोनोवा को क्रेमलिन में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी में पुतिन! रूसी सरकार में मिल सकता है ये बड़ा पद

रूस में कयास लगाए जा रहे हैं कि व्लादिमीर पुतिन अपनी छोटी बेटी एकातेरिना तिखोनोवा को विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की जगह बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं. मॉस्को और यूरोप में इस चर्चा ने हलचल मचा दी है.

@Sveta793027
Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह राजनीति नहीं, बल्कि परिवार है. चर्चा है कि पुतिन अपनी छोटी बेटी एकातेरिना तिखोनोवा को सरकार में बड़ी भूमिका देने की तैयारी में हैं. 

बताया जा रहा है कि वह विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की जगह लेने की इच्छुक हैं. अगर ऐसा होता है, तो यह पहली बार होगा जब पुतिन परिवार का कोई सदस्य सीधे रूस सरकार का हिस्सा बनेगा.

लावरोव की कुर्सी पर नजर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 39 वर्षीय तिखोनोवा हाल के दिनों में मॉस्को में बेहद एक्टिव नजर आ रही हैं. द सन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बुडापेस्ट में ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन रद्द होने के बाद से ही तिखोनोवा राजनीतिक रूप से ज्यादा सक्रिय हुई हैं. सूत्रों के अनुसार, वह लावरोव को हटाकर पुतिन के 'किचन कैबिनेट' में शामिल होना चाहती हैं. यह कदम पुतिन के परिवार की रूसी सत्ता में पहली सीधी एंट्री मानी जा रही है.

कौन हैं सार्गेई लावरोव?

75 वर्षीय सर्गेई लावरोव रूस के सबसे अनुभवी और चतुर कूटनीतिज्ञों में से एक माने जाते हैं. वे पिछले दो दशकों से रूस के विदेश मंत्री के पद पर बने हुए हैं. लावरोव ने सीरिया के गृहयुद्ध से लेकर क्रीमिया संकट तक, हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर क्रेमलिन का पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने 2004 में यह पद संभाला था और तब से वे पुतिन के सबसे भरोसेमंद डिप्लोमैट माने जाते रहे हैं.

पुतिन की बेटी की सियासी तैयारी

एकातेरिना तिखोनोवा, पुतिन की पहली पत्नी ल्यूडमिला की छोटी बेटी हैं. उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी से एशियाई देशों पर विशेष अध्ययन किया है. 2022 में तिखोनोवा को रूस की 'इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन कोऑर्डिनेशन काउंसिल' की सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जो देश के बड़े उद्योगपतियों से जुड़ा संगठन है. अब उनकी नजर क्रेमलिन की बड़ी भूमिका पर है, खासकर अंतरराष्ट्रीय मामलों में.

लावरोव और पुतिन में बढ़ी दूरी?

मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बुडापेस्ट शिखर सम्मेलन के रद्द होने के बाद से लावरोव और पुतिन के बीच दूरी बढ़ी है. आगामी जी-20 बैठक में भी लावरोव को शामिल नहीं किया गया, जबकि वे इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त माने जा रहे थे. हालांकि, इस पर न तो पुतिन और न ही लावरोव ने कोई आधिकारिक टिप्पणी की है.

क्रेमलिन की प्रतिक्रिया और कयास

क्रेमलिन प्रवक्ता ने इन खबरों को 'अफवाह' बताते हुए कहा कि ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है. लेकिन पश्चिमी मीडिया का मानना है कि पुतिन अपनी बेटी को धीरे-धीरे सत्ता में लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. द सन ने दावा किया है कि तिखोनोवा ने पुतिन से लावरोव की कार्यशैली को लेकर शिकायत भी की है. हालांकि, फिलहाल पुतिन ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.