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बांग्लादेश में चुनाव धांधली के आरोप में ढाका में आज जमात-ए-इस्लामी ने बुलाया विरोध मार्च, वोटों की गिनती पर उठे सवाल

ढाका में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने चुनाव में कथित धांधली के विरोध में मार्च का आह्वान किया है. NCP ने आरोप लगाया है कि वोटों की गिनती में धांधली हुई है, जबकि BNP सरकार बनाने की तैयारी में है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: बांग्लादेश में नई सरकार बनने से पहले जमात-ए-इस्लामी की लीडरशिप वाले 11-दलों के गठबंधन ने सोमवार को राजधानी ढाका में विरोध मार्च बुलाया है. जमात-ए-इस्लामी ने 13वें नेशनल पार्लियामेंट चुनाव में गड़बड़ी और धांधली और चुनाव के बाद हुई अलग-अलग हिंसा का आरोप लगाते हुए विरोध मार्च बुलाया है.

11-दलों के गठबंधन के लीडर और कार्यकर्ता सोमवार को राजधानी ढाका में विरोध मार्च निकालेंगे. जमात-ए-इस्लामी और NCP ने BNP पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है. नेशनल सिटिजन पार्टी यानी NCP के लीडर नाहिद इस्लाम ने वोट काउंटिंग में फ्रॉड का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कम से कम 10 परसेंट वोटों में धांधली हुई.

जमात सेंट्रल ऑफिस में 11-पार्टी अलायंस की मीटिंग के बाद, नाहिद इस्लाम ने कहा कि कई सीटों पर इलेक्शन फ्रॉड किया गया था. इसलिए दोबारा गिनती होनी चाहिए.

मुख्य विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी की क्या है मांग?

मुख्य विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने रविवार को चुनाव नतीजों को चुनौती दी और इलेक्शन कमीशन से उन 32 सीटों पर वोटों की दोबारा गिनती करने की मांग की, जहां उसके कैंडिडेट गलत तरीके से हारे थे. उनका कहना है कि वोटों की गिनती करते समय धांधली हुई थी. पार्टी ने गुरुवार को BNP की जीत को मानते हुए अपना फेसबुक मैसेज भी वापस ले लिया.

तारिक रहमान ने शफीकुर रहमान से की मुलाकात

BNP चीफ तारिक रहमान ने रविवार को जमात-ए-इस्लामी चीफ शफीकुर रहमान और नेशनल सिटिजन पार्टी यानी NCP के लीडर नाहिद इस्लाम से मुलाकात की. BNP ने इन मीटिंग्स को चुनावों के बाद बांग्लादेश में एक पॉजिटिव पॉलिटिकल शुरुआत का हिस्सा बताया. यह मीटिंग BNP के देश की अगली सरकार बनाने से दो दिन पहले हो रही है.

किस पार्टी को मिली कितनी सीटें?

तारिक रहमान की लीडरशिप वाली BNP ने गुरुवार के पार्लियामेंट्री इलेक्शन में जबरदस्त जीत हासिल की. ​​पार्टी को 49.97 परसेंट वोट और 209 सीटें मिलीं और वह दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापस आ गई. वहीं, जमात-ए-इस्लामी जिसने 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था, उसने अपना अब तक का सबसे अच्छा परफॉर्मेंस दिया बावजूद उसके जमात-ए-इस्लामी को 31.76 परसेंट वोट और 68 सीटें मिलीं.