मक्का-मदीना जाकर मांगते थे भीख, सऊदी की नाक में कर दिया था दम, पाकिस्तान ने 4,300 भिखारियों को नो-फ्लाई लिस्ट में डाला
सऊदी अरब के अधिकारियों ने सितंबर 2023 में पाकिस्तान से मांग की थी कि वह अपने नागरिकों, खासकर भिखारियों, को हज और उमरा वीजा का दुरुपयोग करने से रोके. इन भिखारियों का मुख्य रूप से उद्देश्य सऊदी अरब के पवित्र शहरों मक्का और मदीना में भीख मांगना था जो धार्मिक यात्रा के लिए आए हुए यात्रियों के लिए एक बड़ा संकट बन गया था.
पाकिस्तान में बढ़ते भिखारी संकट और उनके विदेशी देशों में पहुंचने की बढ़ती प्रवृत्ति ने सरकार को एक सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है. पाकिस्तान ने लगभग 4,300 भिखारियों को नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया है, ताकि वे देश से बाहर न जा सकें, खासकर सऊदी अरब में. यह कदम सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तान से बार-बार की गई चेतावनियों के बाद उठाया गया, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान को उमरा और हज वीजा का दुरुपयोग करके भिखारियों के विदेश जाने पर रोक लगानी चाहिए.
सऊदी अरब ने दी चेतावनी
सऊदी अरब के अधिकारियों ने सितंबर 2023 में पाकिस्तान से मांग की थी कि वह अपने नागरिकों, खासकर भिखारियों, को हज और उमरा वीजा का दुरुपयोग करने से रोके. इन भिखारियों का मुख्य रूप से उद्देश्य सऊदी अरब के पवित्र शहरों मक्का और मदीना में भीख मांगना था जो धार्मिक यात्रा के लिए आए हुए यात्रियों के लिए एक बड़ा संकट बन गया था. इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए पाकिस्तान ने तत्काल कदम उठाते हुए 4,300 भिखारियों को नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया और इसके साथ ही 'भिखारी माफिया' के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी वादा किया.
पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन रजा नकवी ने सऊदी अरब के उप-आंतरिक मंत्री नासिर बिन अब्दुलअजीज अल-दावूद को सूचित किया कि पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई की है और अब ऐसे भिखारियों को विदेश यात्रा करने से रोकने के लिए कड़े उपाय लागू किए गए हैं.
सऊदी अरब में भिखारियों की बढ़ती समस्या
सऊदी अरब में पाकिस्तानियों द्वारा भिक्षावृत्ति एक गंभीर समस्या बन चुकी है. मक्का, मदीना और जेद्दा जैसी प्रमुख शहरों में पाकिस्तानियों द्वारा सड़कों पर भीख मांगने की घटनाएं आम हो गई हैं. पाकिस्तान के कई नागरिक, जो आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, धार्मिक यात्रा के नाम पर सऊदी अरब पहुंचते हैं और फिर वहां पर भीख मांगने लगते हैं. यह समस्या न केवल सऊदी अरब के लिए बल्कि पाकिस्तान के लिए भी एक बदनामी का कारण बन रही है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी, ज़ीशान खानजादा ने 2023 में बताया कि मक्का की पवित्र मस्जिद में पकड़े गए ज्यादातर जेबकतरे पाकिस्तान से ही होते हैं. इसके अलावा, एक रिपोर्ट के अनुसार, 90% से अधिक जेबकतरे मक्का के ग्रैंड मस्जिद से पकड़े जाते हैं, जो पाकिस्तान के नागरिक होते हैं.
सऊदी कानून और भिखारियों का हाल
सऊदी अरब में भिक्षावृत्ति को कानूनी रूप से अपराध माना जाता है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है. भिखारी को छह महीने तक की जेल और 50,000 रियाल तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा, जो लोग भिक्षावृत्ति करने में मदद करते हैं या इसे बढ़ावा देते हैं, उन्हें भी सजा दी जा सकती है. इसी कारण, कई पाकिस्तानी नागरिक सऊदी जेलों में बंद हैं.
पाकिस्तान की विदेशों में भिखारी समस्या
पाकिस्तान से बाहर भिखारियों की यह समस्या सिर्फ सऊदी अरब तक सीमित नहीं है. UAE, इराक और अन्य पश्चिमी एशियाई देशों में भी पाकिस्तानी भिखारियों की मौजूदगी बढ़ी है. 2023 में, कराची से सऊदी अरब जाने वाली एक उड़ान से 16 भिखारियों को उतार दिया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, जो जेद्दा में भिक्षावृत्ति करने के इरादे से जा रहे थे. इसके अलावा, पाकिस्तान में लगभग 10 मिलियन नागरिक विदेशों में रहते हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या में भिखारी शामिल हैं. इस समस्या के बढ़ने से सऊदी अरब और अन्य देशों में पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा मिलना भी मुश्किल हो गया है.
पाकिस्तान का कदम और भविष्य की रणनीति
इस बढ़ती समस्या के मद्देनजर, पाकिस्तान सरकार ने वीजा नियमों को कड़ा किया है और विदेशों में भिखारियों के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने का संकल्प लिया है. पाकिस्तान ने यह सुनिश्चित करने के लिए सऊदी अरब को आश्वस्त किया है कि वह भिखारी माफिया को जड़ से खत्म करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.
पाकिस्तान की यह कार्रवाई सऊदी अरब और अन्य देशों के लिए एक राहत की बात हो सकती है, लेकिन यह इस बात का संकेत भी है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक समस्याओं और विदेशों में होने वाली असंवेदनशील गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अधिक सख्त कदम उठाने होंगे.