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पाकिस्तानी की सेना बनी 'अदालत', इमरान खान की गिरफ्तारी से जुडी हिंसा मामले में 25 नागरिकों को सुनाई खतरनाक सजा, लोकतंत्र की उड़ी धज्जियां

Pakistan : पाकिस्तान की मिलिट्री अदालतों में नागरिकों को बिना किसी स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया के सजा दी जा रही है, जो संविधान के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन करती है.

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Gyanendra Tiwari

Pakistan : पाकिस्तान में एक सैन्य अदालत द्वारा 25 नागरिकों को विभिन्न आरोपों में 2 से 10 साल तक की कठोर सजा सुनाए जाने से देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. यह सजा इमरान खान की गिरफ्तारी से जुड़े हिंसक प्रदर्शनों के संदर्भ में दी गई है, जब हजारों समर्थकों ने सेना की कई महत्वपूर्ण सुविधाओं पर हमला कर दिया था.

पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग द्वारा शनिवार को यह जानकारी दी गई कि जिन 25 नागरिकों को सजा दी गई, वे 9 मई 2023 को हुए प्रदर्शनों में शामिल थे, जब इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने सैनिकों के ठिकानों और एक जनरल के घर को आग के हवाले कर दिया था. इस हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों लोग घायल हो गए थे.

पाकिस्तान की मिलिट्री कर रही न्यायालयों का काम?

सेना ने इन सजा की पुष्टि करते हुए इसे "राष्ट्र के लिए न्याय का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर" बताया है. हालांकि, कई लोग इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, खासकर उन लोगों का जो इमरान खान के समर्थक हैं और उन्हें लगता है कि यह निर्णय सेना की बढ़ती प्रभावशीलता और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर संकट के रूप में देखा जा सकता है.

सैन्य अदालतों द्वारा सुनाए गए इन फैसलों ने पाकिस्तान में लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं. पाकिस्तान के विपक्षी दल और कई मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की आलोचना की है, यह आरोप लगाते हुए कि सैन्य अदालतें न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन कर रही हैं. 

अमेरिका ने जताई चिंता

इस फैसले के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी पाकिस्तान की सैन्य अदालतों की प्रक्रिया पर चिंता जताई है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि सैन्य tribunals में नागरिकों को सजा देने से न्यायिक स्वतंत्रता और पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है. उन्होंने पाकिस्तान से यह आग्रह किया कि वे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें और उन्हें न्यायपूर्ण प्रक्रिया के तहत सजा दें.

इसके अलावा, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और अफगानिस्तान पर ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत, ज़ल्मय खलीलजाद ने भी पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने की बात की है. उनका कहना है कि पाकिस्तान की सेना और सरकार को इमरान खान के खिलाफ की गई ज्यादतियों को समाप्त करना चाहिए और देश में निष्पक्ष चुनावों का आयोजन करना चाहिए.

इमरान खान गी की गिरफ्तार के बाद हुई थी हिंसा

9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संकट गहरा गया था. इमरान खान के समर्थकों ने यह आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और यह पाकिस्तान में सैन्य शासन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. सेना और सरकार के बीच सत्ता संघर्ष को लेकर पाकिस्तान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.