Pakistan-Iran War: कौन है जैश अल-अदल, जिस पर ईरान ने की पाकिस्तान में सीमा पार हमले की शुरुआत
Pakistan-Iran War: ईरान ने सीमा-पार पाकिस्तान में जिस आतंकी समूह पर हमला किया उसका नाम जैश अल-अदल है. जानिए कौन है ये आतंकी समूह जिस पर हमले के साथ दोनों देशों के बीच सीमा-पार हमलों की शुरुआत हो चुकी है.
Pakistan-Iran War: पाकिस्तान और ईरान में इस समय विवाद चरम पर है. गुरुवार को पाकिस्तान ने ईरान के खिलाफ हमले किए. ये हमले ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई माने जा रहे हैं. पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों में कई आतंकवादियों को मार गिराया. जानकारों के मुताबिक, ईरान में रह रहे पाकिस्तानी मूल के आतंकवादी खुद को सर्माचार कहते हैं.
जैश अल-अदल
ऐसे में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये हमले ईरान में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के चरमपंथियों को खत्म करने के लिए किए गए थे. इसलिए इस अभियान का नाम दिया है- मर्ग बर सर्मचार.
इससे पहले ईरान ने बताया था कि उसके निशाने पर जैश अल-अद्ल नामक संगठन के ठिकाने थे. ईरान के मुताबिक ये संगठन पाकिस्तान की सरजमीं से ईरान में चरमपंथी घटनाओं को अंजाम दे रहा है.
जैश अल-अदल कौन हैं?
जैश अल-अदल, जिसका मतलब है "न्याय की सेना", बलूचिस्तान, पाकिस्तान में सक्रिय एक सुन्नी सलफी आतंकवादी समूह है. वे सीमा पर ईरान से सटे पहाड़ी इलाकों में हमले करते हैं. वे कई सुन्नी आतंकवादी समूहों में से एक हैं जो ईरान के दक्षिण-पूर्वी सीमा के पास स्थित सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत (जिसे असली बलूचिस्तान कहा जाता है) की आजादी के लिए लड़ने का दावा करते हैं. यह प्रांत पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत और हिंद महासागर की सीमा पर भी है.
जैश अल-अदल 2013 से ही ईरानी सीमा रक्षकों पर हमले कर रहे हैं और उन्होंने ईरानी सीमा पुलिस कर्मियों का अपहरण करने और बमबारी करने का दावा किया है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर के मध्य में, जैश अल-अदल ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी शहर रास्क के एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया था, जिसमें 11 ईरानी पुलिस बलों की शहादत हो गई थी.
जैश अल-अदल की जड़ें क्या हैं?
जैश अल-अदल को या तो पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित पुराने जुंदल्लाह आतंकवादी संगठन का एक हिस्सा या उसके एक अलग चेहरे के रूप में देखा जाता है. अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) के कार्यालय के आतंकवाद-विरोधी गाइड में कहा गया है कि जुंदल्लाह ने 2012 में अपना नाम बदलकर जैश अल-अदल (JAA) कर लिया.
2013 से JAA अधिक सक्रिय हो गया, उसी समय जुंदल्लाह पीछे हटने लगा. अमेरिकी विदेश विभाग ने 4 नवंबर, 2010 को जुंदल्लाह को एक विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) के रूप में नामित किया था और 2019 में इसने "जैश अल-अदल" नाम ले लिया.
क्या है इस ग्रुप का टारगेट
बताया जाता है कि जैश अल-अदल की स्थापना 2002 या 2003 में पूर्व जुंदल्लाह नेता अब्दोलमालेक रिगी द्वारा की गई थी. अब्दोलमालेक ने 2010 तक समूह का नेतृत्व किया. उन्हें ईरान द्वारा पकड़ लिया गया और मार दिया गया. अब्दोलमालेक के बाद, समूह कई में विभाजित हो गया, जिनमें से JAA सबसे सक्रिय और प्रभावशाली बन गया.
समूह का घोषित लक्ष्य ईरानी सरकार से बलूच सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की मान्यता प्राप्त करना और बलूच लोगों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता फैलाना बताया जाता है.
जैश-अल-अदल कहां रहता है और कैसे हमले करता है?
जैश-अल-अदल एक आतंकी समूह है जो ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में छिपा रहता है. ये बलूचिस्तान क्षेत्र के दूसरे हिस्सों में भी घूमता-फिरता है, जो ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान तीनों देशों में फैला हुआ है. इसीलिए इसे ईरान का जन प्रतिरोध भी कहा जाता है.
ये आतंकी समूह ज्यादातर ईरान की पुलिस, सेना और सरकारी लोगों पर हमला करता है. ये आम लोगों को भी नहीं छोड़ता, खासकर शिया समुदाय के लोगों को घात लगाकर, गोली मारकर, अगवा कर और बम फोड़कर मारता है. वे हथियारों के तौर पर छोटे बंदूक, बम और कार बम इस्तेमाल करते हैं.
इस आतंकी समूह का सरदार अब्दुल रहीम मुल्लाहजादे है. उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, ना ही उसकी कोई तस्वीर मिलती है. हालांकि ये जरूर पता है कि इस समूह ने ईरान में कई बड़े हमले किए हैं.