बलूचिस्तान की शेरनी को उम्रकैद, लापता लोगों की आवाज उठाने वाली महरंग पर आया बड़ा फैसला

बलूचिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलोच को पाकिस्तान की आतंकवाद रोधी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. उन्हें ग्वादर विरोध प्रदर्शन के दौरान एक अर्धसैनिक जवान की मौत के मामले में दोषी ठहराया गया है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ता माहरंग बलोच को आतंकवाद रोधी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने उन्हें और उनके सहयोगी सिबगतुल्लाह शाह को 2024 में ग्वादर में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक अर्धसैनिक जवान की मौत के मामले में दोषी ठहराया है. उन पर आतंकवाद, देशद्रोह और हत्या सहित कई आरोप लगाए गए हैं.

डॉ. महरंग बलोच ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है. उनके परिवार का कहना है कि फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जाएगी. महरंग की बहन नादिया बलोच ने भी मुकदमे की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि कानूनी लड़ाई जारी रहेगी.

कौन हैं महरंग बलोच?

33 वर्षीय महरंग बलोच पिछले कई वर्षों से बलूचिस्तान में कथित रूप से लापता लोगों के मुद्दे को उठाती रही हैं. उनके लिए यह केवल एक सामाजिक या राजनीतिक अभियान नहीं बल्कि निजी संघर्ष भी है. वर्ष 2009 में उनके पिता अब्दुल गफ्फार लैंगोव कथित रूप से लापता हो गए थे. करीब तीन साल बाद उनका शव मिलने का दावा किया गया. इस घटना के बाद महरंग ने कथित जबरन गायब किए गए लोगों के परिवारों की आवाज उठानी शुरू की.


महरंग बलूच यकजेहती कमिटी के माध्यम से सक्रिय रहीं. यह संगठन बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी, मानवाधिकार उल्लंघन और स्थानीय संसाधनों पर अधिक अधिकार की मांग जैसे मुद्दों को उठाता है. उन्होंने कई विरोध प्रदर्शन और लंबी पदयात्राओं का नेतृत्व किया. वर्ष 2023 में उन्होंने सैकड़ों महिलाओं के साथ इस्लामाबाद तक लगभग 1600 किलोमीटर की पदयात्रा भी की थी.

कब हुई थी गिरफ्तारी?

मार्च 2025 में क्वेटा में विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था. यह प्रदर्शन 13 अज्ञात शवों को दफनाए जाने के बाद शुरू हुआ था. अधिकारियों का कहना था कि ये शव उग्रवादियों के थे, जबकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी. महरंग ने उस समय कहा था कि जबरन गायब किए जाने की घटनाएं विरोध को दबाने के बजाय और बढ़ाती हैं.

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा तथा सोने जैसे संसाधनों से समृद्ध माना जाता है. लंबे समय से यहां अलगाववाद, सुरक्षा अभियान और मानवाधिकारों को लेकर विवाद बना हुआ है. मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि पिछले दो दशकों में हजारों लोग कथित रूप से लापता हुए हैं.

वहीं पाकिस्तान सरकार इन आरोपों से इनकार करती है और कहती है कि कई लोग उग्रवादी संगठनों में शामिल हो गए या देश छोड़कर चले गए. सरकार का यह भी कहना है कि लापता लोगों के अधिकांश मामलों का समाधान किया जा चुका है.