अब प्रधानमंत्री नहीं राष्ट्रपति होगा सबसे ताकतवर? असीम मुनीर के प्लान से पाकिस्तान की सियासत में भूचाल

 पाकिस्तान में सेना प्रमुख असीम मुनीर के बढ़ते प्रभाव के बीच राष्ट्रपति प्रणाली, नए प्रांत और सैन्य भागीदारी जैसे प्रस्तावों की चर्चा ने देश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है.

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Sagar Bhardwaj

पाकिस्तान में सत्ता के ढांचे में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के नेतृत्व में सैन्य प्रतिष्ठान देश के शासन और अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करने पर विचार कर रहा है. प्रस्तावित 10 वर्षीय योजना केवल आर्थिक सुधारों तक सीमित नहीं बताई जा रही, बल्कि संवैधानिक बदलावों तक इसके विस्तार की चर्चा है .

राष्ट्रपति प्रणाली पर विचार

सबसे बड़ा प्रस्ताव पाकिस्तान की मौजूदा संसदीय व्यवस्था को राष्ट्रपति प्रणाली में बदलने से जुड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर का मानना है कि मजबूत राष्ट्रपति के जरिए फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं और नीतियों में निरंतरता लाई जा सकती है. इस मॉडल के लिए तुर्की और मिस्र जैसे देशों का उदाहरण भी चर्चा में बताया गया है, जहां राष्ट्रपति के पास व्यापक कार्यकारी अधिकार हैं.

शरीफ-भुट्टो परिवारों पर असर

पाकिस्तानी राजनीति में शरीफ और भुट्टो-जरदारी परिवार लंबे समय से प्रभावशाली रहे हैं. सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सत्ता के कुछ परिवारों तक सीमित रहने को शासन की कमजोरियों और भ्रष्टाचार से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में राष्ट्रपति प्रणाली लागू होने पर पारंपरिक राजनीतिक दलों की भूमिका और प्रभाव में बड़ा बदलाव संभव है.


नए प्रांतों की तैयारी  

प्रस्तावित 28वें संविधान संशोधन के जरिए नए प्रांत और प्रशासनिक इकाइयां बनाने की संभावना भी बताई जा रही है. इसके साथ केंद्र और प्रांतों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे में बदलाव का प्रस्ताव सामने आने की बात कही गई है. हालांकि, इन सुझावों पर अभी अंतिम राजनीतिक सहमति नहीं बनी है और इन्हें सरकारी नीति के रूप में आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है.

10 साल की आर्थिक योजना

इन राजनीतिक बदलावों के साथ पाकिस्तान की आर्थिक दिशा को लेकर भी दीर्घकालिक योजना तैयार किए जाने की बात सामने आई है. स्पेशल इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन काउंसिल यानी SIFC की योजना में निवेश, खनन, खनिज, रक्षा उद्योग और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा देने पर जोर बताया गया है. यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो पाकिस्तान में सेना, सरकार, नौकरशाही और अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों का पूरा ढांचा बदल सकता है.