बलूचिस्तान में BLA के हमलों में कांपा पाकिस्तान, 120 से ज्यादा लोगों की मौत, 92 आतंकी भी ढ़ेर
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को अलगाववादी आतंकियों के कोर्डिनेटेट हमलों में 120 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. इनमें 92 अलगाववादी शामिल हैं. 33 नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी हमले में हताहत हुए हैं. बलूच लिबरेशन आर्मी BLA ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है. हालांकि सेना ने तेज कार्रवाई कर हमलावरों को नाकाम कर दिया है.
नई दिल्ली: पाकिस्तान के सबसे बड़े और सबसे गरीब प्रांत बलूचिस्तान में शनिवार को अलगाववादी हमलावरों ने कई जगहों पर एक साथ कई हमले कर दहशत फैला दी है. इस हमले में 120 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गवां दी. वहीं पाकिस्तानी सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए 92 अलगाववादियों को मार गिराया है, इनमें तीन सुसाइड बॉम्बर भी शामिल थे.
इन भयावय हमलों में 15 सुरक्षाकर्मी और 18 आम नागरिक की भी मौत हो गई है. क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग, नुश्की, दल्बंदीन, पंजगुर, टंप और पासनी जैसे कई जिलों में हिंसा फैल गई है. मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिए गए हैं, सड़कें जाम रहीं और ट्रेन सेवाएं भी ठप हो गईं. बलूच लिबरेशन आर्मी ने इन सभी हमलों की जिम्मेदारी ली है.
हमलों की तीव्रता और फैलाव
कई जिलों में एक साथ हमले किए गए, जिससे पूरे प्रांत में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. ग्वादर में प्रवासी मजदूरों के कैंप पर भी हमला हुआ, इसमें 11 नागरिक की जान चली गई. इन 11 लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. साथ ही एक जेल पर छापा मारा गया, जहां से कम से कम 30 कैदियों को भी छुड़ा लिया गया और हथियार भी लूट लिए गए. एक जिले में वरिष्ठ सिविल अधिकारी का अपहरण भी हमलावरों ने कर लिया. अस्पतालों में इमरजेंसी लगा दी गई क्योंकि घायलों की संख्या बहुत ज्यादा है.
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सेना की तेज कार्रवाई
पाकिस्तानी सेना ने हमलों पर तत्काल जवाबी कार्रवाई की और क्लियरेंस ऑपरेशन शुरू कर दिए. अधिकारियों ने बताया कि हमले जल्दी ही कमजोर पड़ गए थे. सेना ने 92 आतंकियों को मार गिराया, इनमें तीन सुसाइड बॉम्बर भी शामिल थे. सेना का कहना है कि अलगाववादी हमलावर किसी भी शहर या महत्वपूर्ण जगह पर कब्जा नहीं कर पाए. वहीं प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सुरक्षाबलों की सराहना की है. साथ ही कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा.
बलूच लिबरेशन आर्मी का दावा
प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है. समूह ने यह दावा किया कि उसने सेना, पुलिस और सरकारी ठिकानों पर एक साथ हमले किए हैं. हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि आतंकी कोई क्षेत्रीय नियंत्रण हासिल नहीं कर सके हैं. सेना ने यह भी आरोप लगाया है कि ये हमले बाहर से समर्थन प्राप्त हैं. गौरतल है कि बलूचिस्तान में दशकों से अलगाववादी विद्रोह जारी है.
प्रांत की पुरानी समस्या
गौरतलब है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन सरकार के ध्यान न देने के कारण यहां गरीबी और पिछड़ापन बहुत ज्यादा है. संसाधनों से भरपूर होने के बाद भी स्थानीय लोग विकास से वंचित हैं. यहां सुरक्षा बलों, नागरिकों और विकास परियोजनाओं पर बार-बार हमले होते रहते हैं. ये हमले प्रांत की लंबे समय से चली आ रही अशांति को एक बार फिर उजागर करते दिख रहे हैं. वहीं पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.