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अब इंसानी हरकत से मचेगी तबाही, क्या जागेंगे लाखों साल से सोए वायरस!

वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्कटिक में इस तरह के लाखों वायरस आज भी मौजूद हैं. जैसै- जैसे मानव गतिविधियों से जलवायु गर्म होती जाएगी और वहां की बर्फ पिघलेगी. बर्फ के पानी के साथ ही यह खतरनाक वायरस इंसानों तक पहुंचेंगे और जमकर तबाही मचाएंगे.

Shubhank Agnihotri

 

नई दिल्लीः इस पृथ्वी पर वायरस का अस्तित्व इंसान के अस्तित्व से पहले से रहा है. यहां न जाने कितने वायरस मौजूद हैं जो यदि इंसानों के बीच में आ जाएं तो उसे रोकना असंभव हो जाएगा. डायनासोर युग के बाद पृथ्वी पर जब हिमयुग आया तब कई विनाशकारी घातक वायरस बर्फ में दब गए. वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्कटिक में इस तरह के लाखों वायरस आज भी मौजूद हैं. जैसै- जैसे मानव गतिविधियों से जलवायु गर्म होती जाएगी और वहां की बर्फ पिघलेगी. बर्फ के पानी के साथ ही यह खतरनाक वायरस इंसानों तक पहुंचेंगे और जमकर तबाही मचाएंगे. वैज्ञानिकों के अनुसार, अभी तक मानव ने ऐसी कोई तकनीक विकसित नहीं कर पाई है जो इन खतरनाक वायरस से निपट सकें.

जलवायु गर्म होगी, वायरस जिंदा होंगे
रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि आर्कटिक के पर्माफ्रॉस्ट में कई विनाशकारी और खतरनाक वायरस दफन हैं. यह तब जिंदा होंगे जब जलवायु गर्म होगी और बर्प पिघलेगी. वैज्ञानिकों का यह दावा इसलिए मजबूत है क्योंकि साल 2025 में इन्हीं में से एक जॉम्बी वायरस को जिंदा किया गया था. यह वायरस भी वहां लाखों सालों से दफन था.


आधुनिक बैक्टीरिया को प्रभावित किया

पीएलओएस कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी जर्नल में पब्लिश हुई एक स्टडी में एक प्राचीन समय के वायरस और आज के समय के बैक्टीरिया को डिजिटली तैयार किया गया. इस स्टडी में पता चला कि कैसे इस प्राचीन समय के वायरस ने आधुनिक जीवाणुओं को प्रभावित किया. इसी स्टडी को आधार बनाकर यह दावा किया जा रहा है कि अतीत में जो वायरस लाखों साल पहले बर्फ में दफन हो गए थे. अब पृथ्वी पर उनके माकूल तंत्र बन रहा है जिससे वह दोबारा जिंदा हो सकें.


नासा की भी जारी है रिसर्च

आर्कटिक क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से होने वाले परिणामों को लेकर कई शोध किए गए हैं. इनमें से एक स्टडी नासा की ओर से भी की जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में नासा की एक स्टडी में पता चला कि पर्माफ्रॉस्ट के लगातार पिघलने के कारण बड़ी मात्रा में कार्बन रिलीज हो रहा है. इससे लाखों सालों से कैद वायरस भी आजाद हो जाएंगे.

 

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