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'डलास नहीं, ऐसा लगता है जैसे पाकिस्तान में है', अमेरिकी सांसद के बयान से भड़का विवाद, मुस्लिम समुदाय में रोष

अमेरिकी सांसद ब्रैंडन गिल के 'डलास में इस्लामीकरण' वाले बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मुस्लिम समुदाय ने इसे भेदभावपूर्ण बताया, जबकि राजनीतिक बहस में इमिग्रेशन और सांस्कृतिक पहचान फिर केंद्र में आ गई है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: अमेरिका में इमिग्रेशन और सांस्कृतिक पहचान को लेकर चल रही बहस के बीच टेक्सास से रिपब्लिकन सांसद ब्रैंडन गिल के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. गिल ने दावा किया कि डलास के कुछ इलाकों में 'इस्लामीकरण' हो रहा है और वहां जाना 'पाकिस्तान जैसा' लगता है. उनके इस बयान पर मुस्लिम समुदाय, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जबकि इसे नफरत फैलाने वाला बताया जा रहा है.

डलास को लेकर सांसद का बयान

सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में ब्रैंडन गिल ने कहा कि उनके पास ऐसे मतदाता आ रहे हैं, जो डलास क्षेत्र में तेजी से बदलती जनसांख्यिकी को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने मस्जिदों के निर्माण और नए आवासीय इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि स्थानीय संस्कृति 'मूल रूप से बदल' रही है. गिल के मुताबिक, मॉल में जाने पर ऐसा महसूस होता है जैसे टेक्सास नहीं, बल्कि पाकिस्तान में हों.

मुस्लिम समुदाय की तीखी प्रतिक्रिया

टेक्सास के मुस्लिम समुदाय और सामाजिक संगठनों ने गिल के बयान को अपमानजनक और भ्रामक बताया. उनका कहना है कि ऐसे बयान अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ हैं और मुस्लिम अमेरिकियों को अलग-थलग करते हैं. टेक्सास टेक यूनिवर्सिटी से जुड़े पाकिस्तानी मूल के डॉक्टर हाशम सरवर ने गिल की पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें वे पाकिस्तानी समुदाय से चंदा लेते दिख रहे हैं. 

पत्रकारों और टिप्पणीकारों की आलोचना

ब्रिटिश-अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन ने गिल के बयान को इस्लामोफोबिक करार दिया. वहीं राजनीतिक टिप्पणीकार सारा स्पेक्टर ने याद दिलाया कि 2019 के एल पासो हमले का आरोपी श्वेत था, जिससे नस्ल और धर्म को अपराध से जोड़ने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़े हुए. सोशल मीडिया पर गिल की टिप्पणियों को नफरत फैलाने वाला बताया गया.

इमिग्रेशन बहस और पुराना रिकॉर्ड

ब्रैंडन गिल पहले भी इमिग्रेशन को लेकर विवादित बयान देते रहे हैं. उन्होंने हाल में कहा था कि 'आत्मघाती इमिग्रेशन सिस्टम' अमेरिका को नुकसान पहुंचा रहा है. टेक्सास में जहां इमिग्रेशन बहस मुख्य रूप से लैटिन अमेरिकी प्रवासियों पर केंद्रित रहती है, वहां गिल के बयान ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सम्मान पर नई बहस छेड़ दी है.