'सम्मान किसी को सौंपा नहीं जा सकता', वेनेजुएला की नेता मारिया कोरिना माचाडो के ट्रंप को मेडल देने पर भड़का नोबेल फाउंडेशन
वेनेजुएला की नेता मारिया कोरिना माचाडो द्वारा ट्रंप को नोबेल पुरस्कार सौंपने के बाद विवाद गहरा गया है. नोबेल फाउंडेशन ने साफ किया कि पुरस्कार न तो साझा हो सकता है और न ही प्रतीकात्मक रूप से दिया जा सकता है.
नई दिल्ली: अमेरिका और वेनेजुएला की राजनीति से जुड़ा एक नया विवाद उस वक्त सामने आया, जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंप दिया. इस कदम के कुछ ही दिनों बाद नोबेल फाउंडेशन ने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि नोबेल पुरस्कार किसी अन्य व्यक्ति को प्रतीकात्मक रूप से भी नहीं दिया जा सकता. इस स्पष्टीकरण ने वैश्विक राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है.
नोबेल फाउंडेशन की सख्त दो-टूक
नोबेल फाउंडेशन ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि किसी भी नोबेल पुरस्कार को न तो हस्तांतरित किया जा सकता है और न ही किसी और को प्रतीकात्मक रूप से सौंपा जा सकता है. फाउंडेशन ने जोर देकर कहा कि उसका मुख्य उद्देश्य नोबेल पुरस्कार की गरिमा और उसकी प्रशासनिक प्रक्रिया की रक्षा करना है. संस्था ने यह भी याद दिलाया कि अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार पुरस्कार केवल उन्हीं लोगों को दिया जाता है जिन्होंने मानवता के लिए असाधारण योगदान दिया हो.
व्हाइट हाउस की मुलाकात और पदक सौंपने का मामला
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 15 दिसंबर को मारिया कोरिना माचाडो ने व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक ट्रंप को सौंपते हुए कहा कि यह वेनेजुएला की स्वतंत्रता के लिए उनके 'अद्वितीय समर्थन' की मान्यता है. ट्रंप ने बाद में सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर खुद इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने यह सम्मान स्वीकार किया है.
नोबेल समिति का पुराना रुख
माचाडो के इस कदम के बाद नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट ने भी अपना रुख दोहराया. संस्था ने कहा कि नोबेल पुरस्कार उस व्यक्ति या संगठन से अविभाज्य रूप से जुड़ा रहता है, जिसे यह दिया गया हो. इससे पहले भी नोबेल समिति स्पष्ट कर चुकी है कि यह पुरस्कार न तो वापस लिया जा सकता है, न साझा किया जा सकता है और न ही किसी अन्य को स्थानांतरित किया जा सकता है.
ट्रंप और नोबेल की पुरानी चाह
डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर आकर्षण कोई नया नहीं है. वह कई बार सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि उन्होंने कई युद्ध खत्म कराए हैं. ट्रंप अक्सर यह भी उल्लेख करते हैं कि उनसे पहले चार अमेरिकी राष्ट्रपति, जिनमें बराक ओबामा शामिल हैं, यह पुरस्कार जीत चुके हैं. ट्रंप ने एक पोस्ट में यहां तक कहा था कि नॉर्वे ने उन्हें यह पुरस्कार न देकर गलती की.
राजनीति, कूटनीति और बढ़ता विवाद
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका की भूमिका वेनेजुएला की राजनीति में लगातार चर्चा में है. माचाडो की अमेरिका यात्रा, ट्रंप से मुलाकात और पदक सौंपने की घटना को कई विश्लेषक राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि, नोबेल फाउंडेशन के ताजा बयान के बाद यह साफ हो गया है कि इस प्रतीकात्मक कदम का कोई औपचारिक या कानूनी महत्व नहीं है.