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'किंग चार्ल्स III से कोहिनूर भारत को लौटाने का आग्रह करेंगे', ब्रिटेन के राजा से मिलने से पहले बोले न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी

न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने कोहिनूर को लेकर एक बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि वह राजा चार्ल्स तृतीय से मुलाकात के दौरान इस हीरे को भारत को वापस लौटाने की बात करेंगगें.

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Shanu Sharma

न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी के नाम की चर्चा पूरी दुनिया में है. हालांकि अभी उनसे जुड़ी एक नई बात ने फिर से लोगों का ध्यान अपनी ओर खिंचा है. खास कर भारत के लोग उनके एक बयान से काफी प्रभावित हुए हैं. दरअसल, ममदानी ने ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय से कोहिनूर हीरे को भारत लौटाने का अनुरोध करने की इच्छा जताई है. 

भारतीय मूल के मेयर ममदानी ने कहा कि यदि उन्हें राजा के साथ निजी बातचीत का अवसर मिला तो वह सम्मानपूर्वक इस ऐतिहासिक रत्न को भारत वापस लौटाने के लिए प्रोत्साहित जरूर करेंगे. हालांकि उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह सपष्ट किया है कि कोहिनूर उनकीआधिकारिक चर्चा का हिस्सा नहीं है, लेकिन निजी मुलाकात के दौरान इस विषय पर बात करने की मंशा है.

जोहरान ममदानी और ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय की मुलाकात

जोहरान ममदानी ने मीडिया के सामने इस बात को रखने के बाद राजा चार्ल्स तृतीय से मुलाकात की. उनकी यह मुलाकात न्यूयॉर्क के 9/11 मेमोरियल एंड म्यूजियम में हुई. राजा चार्ल्स और उनकी पत्नी क्वीन कैमिला ने 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों में जान गंवाने वाले हजारों निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की. दोनों नेताओं के बीच बातचीत संक्षिप्त लेकिन सौहार्दपूर्ण रही.

तस्वीरों में मेयर ममदानी और किंग चार्ल्स को मुस्कुराते हुए, हाथ मिलाते हुए और अनौपचारिक बातचीत करते नजर आएं, हालांकि, इस दौरान कोहिनूर हीरे के मुद्दे पर कोई चर्चा हुई या नहीं इस बात को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है. ममदानी की टिप्पणियों ने तुरंत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया. उनकी भारतीय जड़ों और कोहिनूर को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस को देखते हुए उनके बयान पर लोगों का भी काफी रिएक्शन देखने को मिला.

शुरू से विवादों में रहा कोहिनूर

कोहिनूर की लड़ाई आज की नहीं बल्कि सालों पुरानी है. इस विवादास्पद हीरे का वजन 105.6 कैरेट है. यह हीरा सदियों तक मुगल, फारसी, अफगान और सिख साम्राज्यों के हाथों में रहा. जिसके बाद सन् 1849 में लाहौर की संधि के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था. उस समय महाराजा रणजीत सिंह के पुत्र युवा महाराजा दलीप सिंह को इस हीरे को सौंपने के लिए मजबूर किया गया था. वर्तमान में कोहिनूर ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है और लंदन के टॉवर ऑफ लंदन में आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जाता है. भारत की ओर से कई बार इसे वापस लौटाने की मांग की गई है. लेकिन ब्रिटेन इसे अपना अधिकार मानता  है.