ईरान ने तबाह हुए परमाणु ठिकानों को किया आबाद, सैटेलाइट तस्वीरों से खुला राज, ट्रंप-नेतन्याहू फिर से हवाई हमलों से मचाएंगे ताडंव!
नई सैटेलाइट तस्वीरों में ईरानी न्यूक्लियर साइट्स पर दोबारा काम शुरू होता दिख रहा है. इससे अमेरिका और इजराइल में चिंता बढ़ गई है और ईरान के इरादों पर सवाल उठ रहे हैं.
नई दिल्ली: पिछले साल इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किए गए विनाशकारी हवाई हमलों के बाद ईरान के परमाणु स्थलों पर फिर से गतिविधि देखी जा रही है. हाल की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान ने अपने दो प्रमुख परमाणु केंद्रों इस्फहान और नतांज में क्षतिग्रस्त जगहों पर नई छत संरचनाएं और कवर बनाए हैं.
प्लेनेट लैब्स PBC द्वारा जारी नवीनतम सैटेलाइट तस्वीरों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है कि तेहरान हमलों में बची संवेदनशील परमाणु सामग्री को छिपाने या बरामद करने की कोशिश कर रहा है. जून में इजराइल और ईरान के बीच 12-दिवसीय संघर्ष के बाद किसी भी बमबारी वाले परमाणु स्थल पर यह पहली बड़ी निर्माण गतिविधि देखी गई है.
क्या है इसकी वजह?
नई छतों से सैटेलाइट के लिए जमीन पर होने वाली गतिविधियों को देखना मुश्किल हो जाता है. यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के निरीक्षकों को देश में आने की अनुमति नहीं दी है. इसलिए रिमोट मॉनिटरिंग ही निगरानी का एकमात्र साधन है.
विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि इन छतों का उद्देश्य नए परमाणु निर्माण से ज्यादा संवेदनशील उपकरणों और मलबे के नीचे दबे यूरेनियम के भंडार को छिपाना और बचाना हो सकता है. फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज की एंड्रिया स्ट्राइकर के अनुसार, ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इजराइल या संयुक्त राज्य अमेरिका यह न देख सकें कि उनके हमलों के बाद क्या बचा है.
क्यों हैं ये जरूरी?
तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दूर स्थित नतांज ईरान का सबसे प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र रहा है, जहां यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक समृद्ध किया गया था. जून में, इजराइल ने वहां मुख्य जमीन के ऊपर की संवर्धन इकाई को नष्ट कर दिया, जबकि बाद में अमेरिका ने बंकर-बस्टर बमों से भूमिगत हिस्सों पर हमला किया.
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि नतांज में एक नई छत का निर्माण दिसंबर में शुरू हुआ और महीने के अंत तक पूरा हो गया, हालांकि ऐसा बताया जा रहा है कि वहां की बिजली प्रणाली अभी भी चालू नहीं है. तस्वीरों में नतांज के पास पिकैक्स माउंटेन नाम की एक जगह पर चल रही खुदाई भी दिख रही है, जहां एनालिस्ट्स का मानना है कि ईरान एक नई अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फैसिलिटी बना रहा है.
सैटेलाइट तस्वीरों और क्या पता चला?
सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी पता चलता है कि ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम से जुड़ी जगहों पर काम फिर से शुरू कर दिया है. तेहरान के पास पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स में 'तालेघान-2' साइट, जो पहले न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े विस्फोटक टेस्टिंग से जुड़ी थी, उसे फिर से डेवलप किया जा रहा है. एनालिस्ट्स का कहना है कि इस साइट को ज्यादा मजबूत और हमलों से बचाने वाला बनाया जा रहा है.