पहने ना फिर हां...भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की रेस्क्यू टीमों की मदद लेने को कैसे राजी हुआ नेपाल?
भोटेकोशी बाढ़ के बाद बढ़ते कूटनीतिक दबाव के बीच नेपाल ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमों को सीमित बचाव कार्यों में मदद की मंजूरी दी.
अचानक आई भोटेकोशी नदी की बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने अपना पहले का फैसला बदलते हुए भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमों को सीमित बचाव कार्यों में शामिल होने की अनुमति दी है.
किन कामों में ली जाएगी विदेशी एक्सपर्ट्स की मदद
नेपाल सरकार के मुताबिक, विदेशी टीमों की मदद खास तौर पर हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव, DNA जांच तथा फॉरेंसिक जांच में ली जाएगी.
किन जिलों में विदेशी टीमें चलाएंगी अभियान
भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों को रासुवा और नुवाकोट जिलों की हाइड्रोपावर सुरंगों में चल रहे बचाव अभियान में मदद करने की अनुमति दी जाएगी.
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नेपाल ने पहले विदेशी मदद क्यों ठुकराई थी
नेपाल सरकार ने पहले कहा था कि उसके अपने बचावकर्मी सर्च और रेस्क्यू अभियान चलाने में सक्षम हैं, इसलिए विदेशी टीमों को ऑपरेशन में शामिल करने की जरूरत नहीं है.
अब फैसला बदलने की जरूरत क्यों पड़ी
भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे आई भीषण बाढ़ में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और लापता हुए हैं, जबकि कई देशों के नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है.
कितने विदेशी नागरिक अभी लापता बताए जा रहे हैं
शुक्रवार तक 31 देशों के 517 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी थी, जिनमें 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिक शामिल बताए गए.
भारत ने नेपाल को किस तरह की मदद की पेशकश की
भारत ने टनल-रेस्क्यू टीम, मेडिकल टीम और NDRF के जवान भेजने की पेशकश की है. राहत सामग्री की चौथी खेप के साथ डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यीय टीम भी भेजी जा रही है.
दक्षिण कोरिया ने क्या मदद मांगी थी
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने नेपाल से तत्काल प्रतिक्रिया टीम के साथ सहयोग करने को कहा था. नेपाल में नौ दक्षिण कोरियाई नागरिक अब भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं.
क्या नेपाल को अन्य देशों से भी मदद की पेशकश मिली
कई अन्य देशों की सरकारों ने राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमें भेजने की इच्छा जताई है, लेकिन नेपाल ने फिलहाल भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की मदद को ही मंजूरी दी है.