NASA ने कर दिखाया चमत्कार, मंगल ग्रह से सही सलामत लौट आए 4 वैज्ञानिक! 

NASA News: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने धरती पर मंगल ग्रह के वातावरण वाला एक 3 डी प्रिंटेड आवास बनाया था. इस आवास में चार वैज्ञानिक एक साल से ज्यादा समय तक रुकने के बाद वापस लौट आए हैं. इस दौरान उन्होंने कई प्रकार के अध्ययन भी किए हैं. नासा मंगल मिशन पर इंसानों को भेजने से पहले ही सिमुलेटेड ट्रेनिंग करा रहा है जिससे मंगल ग्रह पर आने वाली तकलीफों का समाधान किया जा सके.

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NASA News: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के चार वैज्ञानिक मंगल ग्रह की एक साल यात्रा पूरी करने के बाद वापस लौट आए हैं. बता दें कि नासा ने ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में मंगल ग्रह के वातावरण वाला 3डी प्रिंटर की मदद से एक बंद इलाका बनाया है. इसी से चारों वैज्ञानिक 378 दिन  बिताने के बाद बाहर निकले हैं. चारों वैज्ञानिक जब बाहर आए तो नासा के अन्य वैज्ञानिक साथियों ने उनका तालियों से स्वागत किया. दरअसल नासा यह पता लगाना चाहता है कि इंसानों को मंगल ग्रह पर भेजने पर किस तरह की परेशानियों का सामना करना होगा? 

नासा ने इस दौरान कई नई बातों के बारे में भी जानकारी हासिल की. ह्यूस्टन के 1700 स्क्वायर फीट में बनाए गए स्पेशल घर में एक मिशन स्पेशलिस्ट, दो प्रोफेशनल्स, और एक मेडिकल ऑफिसर को भेजा गया था. चारों वैज्ञानिकों ने इस दौरान वहां सब्जियां उगाईं, व्यायाम किया और कई तरह के वैज्ञानिक प्रयोग भी किए.

मंगल ग्रह जैसा वातावरण

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा इस बात का पता लगाना चाहती थी कि आखिर मंगल ग्रह पर इंसानों को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. नासा ने इस मिशन का नाम CHAPEA) रखा था. इस मिशन में साइंटिस्ट को ठीक वैसे ही माहौल में रखा गया जैसा मंगल ग्रह के ऊपर होता है. चारों वैज्ञानिक एक साल की अवधि के दौरान किसी से भी नहीं मिल सके थे. 

नासा का यह है लक्ष्य 

वैज्ञानिकों को 378 दिनों में कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ा. उन्होंने वहां मार्सवॉक भी किया. संसाधनों के अभाव में यदि वहां कोई चीज खराब हो जाती थी तो उन्हें उसे खुद ही ठीक करना होता था. इस दौरान उन्होंने वहां पर खेती भी की. कहा जा रहा है भविष्य में मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने से पहले इस तरह ही ट्रेनिंग कराई जाए. वैज्ञानिकों को जिस 3 डी घर में रखा गया था उसका नाम मार्स ड्यून अल्फा रखा गया था. नासा का साल 2030 तक इंसान को मंगल ग्रह पर कदमताल कराना है.