नासा ने अंतरिक्ष में पहली बार मेडिकल निकासी अभियान चलाकर रचा इतिहास, जानें क्या हैं इसके मायने?

धरती पर वापस लौटने वाले दल में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री माइक फिंके और जेना कार्डमैन, रूसी अंतरिक्ष यात्री ओलेग प्लाटोनोव और जापानी अंतरिक्ष यात्री किमिया युई शामिल थे.

@SpaceX
Sagar Bhardwaj

नासा ने पुष्टि की है कि एक चालक दल के सदस्य की स्वास्थ्य समस्या के कारण चार अंतरिक्ष यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से समय से पहले वापस लौटना पड़ा. हालांकि अंतरिक्ष एजेंसी ने स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी लेकिन अधिकारियों ने कहा कि लगातार जोखिम बना हुआ है और निदान को लेकर अनिश्चितता थी जिसके कारण पृथ्वी पर आगे की चिकित्सा जांच आवश्यक हो गई.

एजेंसी ने इस बात पर जोर दिया कि यह कोई आपातकालीन स्थिति नहीं थी और प्रभावित अंतरिक्ष यात्री पूरी प्रक्रिया के दौरान स्थिर स्थिति में था. बताया गया कि बीमार अंतरिक्ष यात्री को इसलिए वापस लाया गया ताकि  उसका निदान हो सके और उसे जमीन पर सारी सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें.

विमान में कौन-कौन से अंतरिक्ष यात्री थे सवार

धरती पर वापस लौटने वाले दल में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री माइक फिंके और जेना कार्डमैन, रूसी अंतरिक्ष यात्री ओलेग प्लाटोनोव और जापानी अंतरिक्ष यात्री किमिया युई शामिल थे. वे स्पेसएक्स के क्रू-11 मिशन का हिस्सा थे  और उन्होंने परिक्रमा कर रही प्रयोगशाला में लगभग पांच महीने बिताए थे.

कब और कहां उतरे अंतरिक्ष यात्री

नासा के फुटेज में गुरुवार को स्थानीय समयानुसार राज 12.41 बजे सैन डिएगो के तट से दूर प्रशांत महासागर में कैप्सूल को गिरते हुए दिखाया गया. सफर लैंडिग के तुरंत बाद  बचाव दल तैनात कर दिए गए.

पिछले मिशनों से किस प्रकार भिन्न था ये मिशन

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सेवा केंद्र (ISS) में 25 वर्षों से अधिक समय तक निरंतर मानव विकास के दौरान यह पहली चिकित्सा आपातकालीन निकासी थी. हालांकि अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में चिकित्सा स्थितियों को संभालने का प्रशिक्षण दिया जाता है लेकिन यह पहली बार था जब स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण किसी मिशन को बीच में ही रोकना  पड़ा.

नासा ने कहा कि चालक दल किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार था और उन्होंने शांत और पेशेवर तरीके से वापसी की. चारों अंतरिक्ष यात्री अगस्त की शुरुआत में आईएसएस पहुंचे थे  यह मिशन मध्य फरवरी तक का था, जिसके बाद उनकी जगह अगले दल को भेजा जाना था.