ईरान में विरोध की सजा 'मौत'? इरफान सोलतानी को फांसी देने की तैयारी कर रही खामेनेई सरकार

ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ काफी व्यापक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. इसी बीच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ खामेनेई प्रशासन भी सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली: ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन चलाया जा रहा है. लोग सड़कों पर उतरकर खामेनेई प्रशासन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. वहीं अब सरकार भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने जा रही है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, 26 वर्षीय इरफान सोलतानी को जल्द ही फांसी की सजा दी जाने की तैयाीर शुरू हो गई है, जो इन प्रदर्शनों से जुड़ी पहली ऐसी घटना होगी. तेहरान के करज उपनगर फरदीस के निवासी सोलतानी को जनवरी की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था. 

प्रदर्शनकारियों को डराने की कोशिश 

मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि यह सजा बुधवार को अमल में लाई जा सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह आगे के प्रदर्शनों को रोकने के लिए डर का माहौल बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. सोलतानी को 8 जनवरी को विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के आरोप में हिरासत में लिया गया.

ये प्रदर्शन जनवरी की शुरुआत से पूरे ईरान में फैल चुके हैं, जो मूल रूप से आर्थिक संकट से उपजे थे. इजरायल और अमेरिका आधारित न्यूज आउटलेट जेफीड की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोलतानी का मामला जल्दबाजी में निपटाया जा रहा है, ताकि अन्य प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाया जा सके. नॉर्वे में पंजीकृत कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगाव ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर गंभीर चिंता जताई है. 

कानूनी संघर्षों का करना पड़ा सामना

सोलतानी के परिवार को 11 जनवरी को सूचित किया गया कि मौत की सजा सुनाई जा चुकी है. इसके बाद उन्हें सिर्फ 10 मिनट की मुलाकात की अनुमति मिली. परिवार के एक करीबी सूत्र ने हेंगाव को बताया कि अधिकारियों ने सजा को अंतिम घोषित कर दिया है और इसे जल्द अमल में लाया जाएगा. सोलतानी की बहन, जो खुद एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं, ने मामले को कानूनी तरीके से चुनौती देने की कोशिश की. हालांकि, उन्हें केस फाइल तक पहुंच नहीं दी गई और न ही सोलतानी का प्रतिनिधित्व करने की इजाजत मिली.

ये विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए, जब गंभीर आर्थिक संकट ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया. ईरानी रियाल की कीमत में भारी गिरावट, बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों में वृद्धि ने आम नागरिकों, दुकानदारों और छात्रों को प्रभावित किया. तेहरान के बाजारों से शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही अन्य शहरों में फैल गया.