Israel-Iran Conflict: क्या अयातुल्लाह अली खामेनेई सत्ता से होंगे बेदखल! ईरान के पूर्व राजा के बेटे ने भरी बुलंद आवाज

रजा पहलवी अमेरिका में रहते हुए वहां के नीति निर्माताओं, थिंक टैंक्स और मीडिया के साथ लगातार संवाद करते हैं. ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच, जहां ईरान अमेरिका को "महाशैतान" और अमेरिका ईरान को "बुराई की धुरी" कहता है, रजा पहलवी की विचारधारा अमेरिकी हितों के अनुरूप मानी जाती है.

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Mayank Tiwari

ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसी आवाज उभर रही है, जो ईरान की सत्ता को चुनौती दे रही है. यह आवाज है रजा पहलवी की, जिनके पिता शाह मोहम्मद रजा पहलवी 46 साल पहले 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान ईरान छोड़कर भागने को मजबूर हुए थे. रजा पहलवी, जो अब अमेरिका में रहते हैं, दावा करते हैं कि वे पिछले 40 सालों से ईरान में लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनका कहना है, "अब हमारा समय आ गया है."

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 1979 में ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति ने न केवल देश का राजनीतिक और सामाजिक ढांचा बदल दिया, बल्कि दो प्रमुख व्यक्तियों के भाग्य को भी पूरी तरह पलट दिया. एक ओर थे शाह मोहम्मद रजा पहलवी, जो 26 साल तक ईरान के शासक रहे, और दूसरी ओर थे अयातुल्ला खुमैनी, जिन्हें क्रांति के बाद ईरान का सर्वोच्च नेता बनाया गया. 

1979 की क्रांति ने बदला ईरान का इतिहास

इस क्रांति ने उदारवादी ईरान को कट्टरपंथ की ओर धकेल दिया. शाह मोहम्मद रजा पहलवी को सत्ता से बेदखल कर मिस्र भागना पड़ा, जहां उनकी जान बचाने की जद्दोजहद शुरू हुई. वहीं, 14 साल तक इराक और फ्रांस में निर्वासित जीवन बिता रहे अयातुल्ला खुमैनी का ईरान में लाखों लोगों ने भव्य स्वागत किया. खुमैनी ने क्रांति का नेतृत्व किया और ईरान को इस्लामिक गणराज्य में तब्दील कर दिया.

खुमैनी से खामेनेई: सत्ता की विरासत

3 जून 1989 को अयातुल्ला खुमैनी की मृत्यु के बाद उनके शिष्य अली खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता चुना गया. उस समय खामेनेई ग्रैंड अयातुल्ला नहीं थे, जो सुप्रीम लीडर बनने के लिए संवैधानिक रूप से आवश्यक था. इसके लिए ईरान के संविधान में संशोधन किया गया. खामेनेई ने खुमैनी की राजनीतिक और धार्मिक विरासत को आगे बढ़ाया और आज भी वे ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता हैं. 

रजा पहलवी: निर्वासित राजकुमार की हुंकार

रजा पहलवी, शाह मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे, आज ईरानी विपक्षी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं. मिस्र में उन्हें राजा की शपथ दिलाई गई थी, लेकिन 1979 की क्रांति ने उनके परिवार को सत्ता से बेदखल कर दिया. अब अमेरिका में रहते हुए रजा पहलवी नेशनल काउंसिल ऑफ ईरान के संस्थापक और नेता हैं. यह एक निर्वासित विपक्षी समूह है, जो ईरान में इस्लामिक गणराज्य को खत्म कर लोकतांत्रिक सुधारों की वकालत करता है. 

रजा पहलवी का राजनीतिक दृष्टिकोण एक संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना पर आधारित है, जहां एक संवैधानिक राजा और लोकतांत्रिक संस्थाएं देश का शासन चलाएंगी. वे कहते हैं, "40 से ज़्यादा सालों से मैं एक ही चीज के लिए लड़ रहा हूं, वो चीज है ईरान में लोकतंत्र. अब हमारा समय आ गया है."

इज़रायल के हमले: रजा पहलवी का समर्थन

हाल के इज़रायली हमलों के बाद रजा पहलवी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "यह उनका युद्ध है, ईरानी लोगों का नहीं. युद्ध तो आखिरकार कुछ भी हो सकता है जो शासन को कमजोर करता है. कुछ भी जो उसे पीछे धकेलता है. यह कुछ ऐसा है जिसका लोग स्पष्ट कारणों से स्वागत करते हैं क्योंकि वे देखते हैं कि उनकी गर्दन पर कसी रस्सी की पकड़ अब ढीली होने वाली है. यह सकारात्मक है, नकारात्मक नहीं."

उन्होंने यह भी कहा, "मैं समझता हूं कि ईरानी शासन के पहले से भी अधिक कमजोर हो जाने के परिणामस्वरूप ईरानी लोगों के लिए आखिरकार स्वयं को स्वतंत्र करने का यह एक अवसर है, बशर्ते कि इस बार दुनिया निष्क्रिय न बैठे और यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करे कि प्रतिबंध लगाने या अन्य उपायों के अलावा वे ईरानी लोगों को लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए अगला कदम उठाने के लिए तैयार हैं."

रजा पहलवी का मानना है कि इज़राइली हमले मौजूदा ईरानी शासन को कमजोर कर सकते हैं, जिससे सत्ता परिवर्तन की राह खुल सकती है. 15 जून को एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इस हमले का उद्देश्य ईरानी लोगों को नुकसान पहुंचाना था. इस हमले का उद्देश्य मूल रूप से शासन के खतरे को बेअसर करना था. स्पष्ट रूप से. इज़राइल सरकार का ईरानी नागरिकों पर हमला करने का कोई इरादा नहीं था."

अमेरिका और इज़रायल के साथ गठजोड़

रजा पहलवी अमेरिका में रहते हुए वहां के नीति निर्माताओं, थिंक टैंक्स और मीडिया के साथ लगातार संवाद करते हैं. ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच, जहां ईरान अमेरिका को "महाशैतान" और अमेरिका ईरान को "बुराई की धुरी" कहता है, रजा पहलवी की विचारधारा अमेरिकी हितों के अनुरूप मानी जाती है. वे अमेरिकी सरकार से ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने और ईरानी जनता का समर्थन करने की अपील करते हैं. साथ ही, रजा पहलवी इज़रायल के साथ अच्छे संबंधों की वकालत करते हैं. उनका मानना है कि इज़रायल के साथ सहयोग से ईरान में सत्ता परिवर्तन संभव हो सकता है. 

ईरानी शासन के खिलाफ आंदोलन

रजा पहलवी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सक्रिय हैं, जहां वे दुनिया भर से ईरान में सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "दमन और दुष्प्रचार इस्लामी गणराज्य के अस्तित्व के दो मुख्य स्तंभ रहे हैं. सैन्य, कानून प्रवर्तन, सुरक्षा बलों, ईरानी ब्रॉडकास्ट और समाचार एजेंसियों सहित शासन के दमनकारी और दुष्प्रचार संस्थानों के साथ सहयोग करना अपराधों और झूठ में मिलीभगत है."

ईरान के भविष्य की उम्मीद

रजा पहलवी का आंदोलन न केवल ईरान के अंदर बल्कि निर्वासित ईरानी समुदाय के बीच भी समर्थन जुटा रहा है. वे मानते हैं कि मौजूदा शासन के कमजोर होने से ईरानी जनता को स्वतंत्रता और लोकतंत्र का अवसर मिलेगा. उनका दावा है कि इज़रायली हमले और अंतरराष्ट्रीय समर्थन से यह संभव हो सकता है.