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अमेरिका के साथ युद्ध विराम पर IRGC का होगा आखिरी फैसला! ईरान की सैन्य और कूटनीति पर अराघची और गालिबफ का नियंत्रण खत्म-रिपोर्ट

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है. इसी बीच सामने आ रहे रिपोर्ट के मुताबिक देश में अब IRGC का कंट्रोल है. रिपोर्ट में ईरान की सैन्य और कूटनीतिक पर भी इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर का नियंत्रण बताया जा रहा है.

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Edited By: Shanu Sharma
अमेरिका के साथ युद्ध विराम पर IRGC का होगा आखिरी फैसला! ईरान की सैन्य और कूटनीति पर अराघची और गालिबफ का नियंत्रण खत्म-रिपोर्ट
Courtesy: X (@Osint613)

ईरान के कट्टरपंथी संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने देश की सैन्य और कूटनीतिक नीति-निर्माण प्रक्रिया पर मजबूत पकड़ बना ली है. 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बदलाव पिछले सप्ताहांत में हुआ, जिसमें आईआरजीसी कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी और उनके करीबी सहयोगियों ने इस्लामिक गणराज्य के भीतर प्रमुख भूमिका संभाल ली. 

रिपोर्ट के मुताबिक, अहमद वाहिदी ने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघर जोलघाद्र का समर्थन हासिल कर लिया है. इससे आईआरजीसी की सैन्य और रणनीतिक कार्रवाइयों पर पकड़ और मजबूत हो गई है. वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आईआरजीसी ने क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है. 

विदेश मंत्री अब्बास अराघची की पावर खत्म?

ईरान में हुए इस बदलाव का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है. ईरान ने इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया. इससे फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज फंस गए और नाकेबंदी की स्थिति और गंभीर हो गई. आईआरजीसी ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी दबाव के जवाब में होर्मुज बंद ही रहेगा.  कहा जा रहा है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत कई प्रमुख हस्तियों की भूमिका सीमित हो गई है. अराघची ने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत के बाद जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की इच्छा जताई थी, लेकिन आईआरजीसी ने उनके इस फैसले को पलट दिया.

टीम के अंदर मतभेद के कारण बड़ा बदलाव

IRGC ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी बंदरगाहों पर दबाव के जवाब में यह महत्वपूर्ण जलमार्ग खुला नहीं रहना चाहिए. आईएसडब्ल्यू की रिपोर्ट में उल्लेख है कि जोलघाद्र का प्रभाव कूटनीतिक प्रयासों तक फैल गया है. उन्हें इस महीने की शुरुआत में वार्ता टीम में शामिल किया गया था, ताकि आईआरजीसी के निर्देशों और सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के अधिकार का पूर्ण पालन सुनिश्चित हो सके. टीम के अंदर आंतरिक मतभेद उभरे, जिसमें जोलघाद्र ने अराघची पर ईरान के समर्थन में लचीलापन दिखाने का आरोप लगाया. कथित तौर पर इसी वजह से वार्ता टीम को तेहरान वापस बुला लिया गया. ईरानी नेतृत्व के अंदर मतभेद अब साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं. अहमद वाहिदी अब मोजतबा खामेनेई के साथ मिलकर प्रमुख निर्णय लेने वाले व्यक्ति के रूप में उभरे हैं.