ईरान के 'बदलापुर' की चपेट में आया ये देश, मुस्लिम राष्ट्र ने दुनिया को दिया अपडेट, आगे क्या होगा?
तुर्की ने बताया कि पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात NATO की वायु और मिसाइल रक्षा इकाइयों ने संयुक्त रूप से इस मिसाइल को निष्क्रिय किया.
नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब अन्य देशों पर भी दिखने लगा है. बुधवार को ईरान की ओर से तुर्की की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई. हालांकि, तुर्की की रक्षा प्रणाली ने समय रहते उस मिसाइल को हवा में ही मार गिराया.
इस घटना की जानकारी तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने साझा की है. मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल ईरान से दागी गई थी. मिसाइल इराक व सीरिया के हवाई क्षेत्र को पार करते हुए तुर्की की ओर बढ़ रही थी. खतरे को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की गई.
मिसाइल को निष्क्रिय किया गया
तुर्की ने बताया कि पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात NATO की वायु और मिसाइल रक्षा इकाइयों ने संयुक्त रूप से इस मिसाइल को निष्क्रिय किया. हाटे प्रांत के डोर्त्योल जिले में जो मलबा गिरा, वह वायु रक्षा प्रणाली का हिस्सा था, जिसने हवा में ही खतरे को खत्म कर दिया था. अधिकारियों ने साफ किया कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और न ही किसी को चोट आई है.
तुर्की सरकार ने क्या कहा?
तुर्की सरकार ने बयान जारी कर कहा कि देश अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है. सरकार ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार तुर्की अपने पास रखता है. और साथ ही तुर्की ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे ऐसे कदम न उठाएं जिनसे क्षेत्र में तनाव और बढ़े. सरकार ने कहा कि वह नाटो और अन्य सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क में है.
मीडिल ईस्ट में तनाव
ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष पहले ही पूरे क्षेत्र में चिंता का कारण बना हुआ है. अब तुर्की पर मिसाइल दागे जाने की घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है. फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन यह घटना संकेत देती है कि मध्य पूर्व का यह संकट और व्यापक रूप ले सकता है.
ड्रोन हमला हुआ विफल
वहीं, सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण तेल कंपनी अरामको एक बार फिर हमलों के घेरे में है. रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला करने की कोशिश को पूरी तरह विफल कर दिया गया है. यह घटनाक्रम ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का हिस्सा है. इस वैश्विक अस्थिरता ने न केवल सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ाई हैं, बल्कि तेल बाजार में कीमतों में भी भारी उछाल ला दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है.