ईरान के निशाने पर अमेरिकी टेक कंपनियां! US की इस 'मजबूत कड़ी' को नेस्तनाबूद करना चाहता है ईरानी शासन?
ईरान की सरकारी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की बड़ी तकनीकी कंपनियों से जुड़ी सुविधाएं अब ईरान के संभावित निशानों की सूची में शामिल हो सकती हैं.
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस संघर्ष में अब एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है, जहां पारंपरिक सैन्य ठिकानों के साथ-साथ तकनीकी ढांचे को भी निशाना बनाए जाने की चर्चा सामने आई है.
ईरानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी टेक कंपनियों से जुड़े डेटा सेंटर और कार्यालय संभावित लक्ष्य बन सकते हैं. हाल की घटनाओं ने संकेत दिया है कि आधुनिक युद्ध अब डिजिटल ढांचे तक पहुंच सकता है.
तकनीकी ढांचे पर बढ़ता खतरा
ईरान की सरकारी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की बड़ी तकनीकी कंपनियों से जुड़ी सुविधाएं अब ईरान के संभावित निशानों की सूची में शामिल हो सकती हैं. रिपोर्ट के अनुसार, गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, आईबीएम, ओरेकल और पालंटियर जैसी कंपनियों के दफ्तरों और तकनीकी ढांचे का जिक्र किया गया. ये ढांचे इजरायल के अलावा दुबई और अबू धाबी जैसे खाड़ी शहरों में भी मौजूद बताए गए हैं.
युद्ध की रणनीति में बदलाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय संघर्ष अब धीरे-धीरे 'इन्फ्रास्ट्रक्चर वॉर' यानी ढांचागत युद्ध की दिशा में बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे युद्ध का स्वरूप बदल रहा है, वैसे-वैसे संभावित लक्ष्यों का दायरा भी बढ़ सकता है. विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल ढांचे पर हमले का असर केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि व्यापक नागरिक जीवन पर भी पड़ेगा.
डेटा सेंटर बन रहे अहम निशाना
हाल के हमलों ने इस आशंका को और मजबूत किया है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी क्षेत्र में अमेजन वेब सर्विसेज से जुड़े कुछ ढांचों को निशाना बनाया. पिछले सप्ताह बहरीन में एक डेटा सेंटर पर ईरानी ड्रोन हमले की खबर सामने आई. इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात में भी अमेजन से जुड़े दो ठिकानों पर हमले की रिपोर्टें सामने आई थी.
बड़े हमले की रिपोर्ट
सबसे गंभीर घटना एक मार्च को बताई जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, उस दिन सुबह लगभग साढ़े चार बजे शहेद-136 ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात में स्थित एक एडब्ल्यूएस डेटा सेंटर को निशाना बनाया. टक्कर के बाद वहां भीषण आग लग गई और पूरे परिसर की बिजली व्यवस्था बंद करनी पड़ी. आग बुझाने की कोशिशों के दौरान इमारत के कुछ हिस्सों को अतिरिक्त नुकसान पहुंचा. बाद में एक और केंद्र पर हमला होने की बात भी सामने आई.
आम लोगों पर असर और बढ़ती चिंता
इन घटनाओं का असर आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ा. दुबई और अबू धाबी में कई डिजिटल सेवाएं कुछ समय के लिए बंद हो गई. लोगों को टैक्सी बुक करने, खाना मंगाने या मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल करने में दिक्कत हुई. संयुक्त अरब अमीरात की करीब एक करोड़ दस लाख आबादी में बड़ी संख्या में प्रवासी रहते हैं, जिनके लिए डिजिटल सेवाएं रोजमर्रा का अहम हिस्सा हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर अब रणनीतिक संपत्ति बन चुके हैं और इन पर हमले आधुनिक युद्ध की नई दिशा दिखाते हैं.
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