भारत का 'हॉर्मुज रेस्क्यू मिशन', फंसे जहाजों को एस्कॉर्ट कर निकालने की तैयारी तेज!
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बुरी तरह प्रभावित है. इसका असर भारतीय जहाजों पर भी पड़ रहा है. हालांकि सरकार भारतीय झंडे वाले जहाजों को बाहर निकालने का विकल्प ढूंढ रही है.
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात प्रभावित है. जिसका असर भारत आने वाले जहाजों पर भी पड़ा है. इसी बीच सोमवार को एक समुद्री नियामक ने बताया कि सरकार भारतीय झंडे वाले जहाजों को इस संकटग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकालने के विकल्पों पर विचार कर रही है.
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (क्रू) पीसी मीणा ने बताया कि सरकार की कोर रिस्पॉन्स टीम द्वारा स्थिति पर बारीकी से नजर रखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आसपास के इलाकों में मौजूद सभी 36 भारतीय झंडे वाले जहाज पूरी तरह सुरक्षित हैं. इन जहाजों पर पर्याप्त सामान है, लेकिन अभी तक कोई जहाज इस क्षेत्र से गुजर नहीं पाया है. हालांकि उन्होंने बताया कि अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है.
ईरानी सैनिकों की धमकी
इजरायल-अमेरिका के साथ ईरान का तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इसी बीच ईरानी सेनाओं ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकरों पर हमले की धमकी दी है. यह रास्ता काफी संकरा है, जो दुनिया के समुद्री कच्चे तेल व्यापार का एक चौथाई हिस्सा संभालता है. यहां आई ट्रैफिक रुकावट का असर अब दुनिया पर नजर आने लगा है.
शिपिंग मिनिस्ट्री के आदेश के अनुसार, कोर ग्रुप को हर तीन घंटे में स्थिति रिपोर्ट देनी होती है. एक अन्य अधिकारी ने कहा कि किसी भारतीय झंडे वाले जहाज के हताहत होने, पकड़े जाने या चढ़ने का कोई पुष्ट मामला नहीं है.
भारतीय जहाजों की सुरक्षा के इंतजाम
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सख्त सुरक्षा नियम सिर्फ होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं हैं. ये ओमान की खाड़ी, फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में भी लागू हैं. 28 फरवरी से 1 मार्च की मध्यरात्रि को इस प्रोटोकॉल को लागू किया गया था.
जिसके तहत सभी भारतीय जहाजों को इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के निर्देशानुसार शिप-शोर सिक्योरिटी ड्रिल करनी होती है. इसमें जहाज और नजदीकी पोर्ट के बीच लाइव संवाद, पाइरेसी, अनधिकृत पहुंच और बम धमकी जैसी स्थितियों की मॉक ड्रिल शामिल है. सरकार की ओर से भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई है. साथ ही उच्च स्तर पर कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं ताकि जहाज सुरक्षित निकल सकें.