भारतीय जहाजों पर हमले को लेकर बढ़ा रहस्य, ट्रंप के दावे और अमेरिकी सेना के बयान में आखिर सच कौन सा है?

ओमान की खाड़ी में भारतीय चालक दल वाले तीन वाणिज्यिक टैंकरों पर हमले में कम से कम तीन भारतीय नाविक शहीद हो गए. अमेरिकी सेंटकॉम ने हेलफायर मिसाइलों से हमले की जिम्मेदारी ली.

Pinterest
Reepu Kumari

नई दिल्ली: समुद्र में कमाई के लिए निकले भारतीय नाविक आज मौत के मुंह में हैं. ओमान की खाड़ी में तीन भारतीय चालक दल वाले टैंकरों पर हुए हमलों ने पूरे देश को झकझोर दिया है. एक तरफ अमेरिकी सेना अपने हमले का वीडियो जारी कर रही है, दूसरी तरफ राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर आरोप लगा रहे हैं. यह विरोधाभास न सिर्फ राजनयिक तनाव बढ़ा रहा है, बल्कि हजारों भारतीय परिवारों को चिंता में डाल दिया है, जिनके सदस्य समुद्र में नौकरी कर रहे हैं.

सेंटकॉम ने स्वीकार किया हमला

सेंटकॉम ने गुरुवार को बयान जारी कर माना कि उसने एम/टी जलवीर, एम/टी सेट्टेबेलो और एम/टी मारिवेक्स नामक तीन जहाजों पर हेलफायर मिसाइलें दागीं. इन जहाजों पर पूरी तरह भारतीय चालक दल थे. सेट्टेबेलो पर तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि 65 अन्य को सुरक्षित निकाला गया. अमेरिका का कहना है कि ये जहाज ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे.

ट्रंप का दावा, सच्चाई से अलग

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इन हमलों को ईरानी ड्रोन हमला बताया. उन्होंने इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' करार दिया. लेकिन सेंटकॉम का बयान और जारी वीडियो इस दावे से बिल्कुल अलग हैं. इस विरोधाभास ने पूरी घटना को और रहस्यमयी बना दिया है.


भारत ने जताया कड़ा विरोध

भारत ने अमेरिका के साथ राजनयिक विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया. जहाजरानी महानिदेशालय ने क्षेत्र में मौजूद भारतीय नाविकों के लिए नई सुरक्षा सलाह जारी की है. वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास 13 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर 622 भारतीय नाविक तैनात हैं.

खाड़ी बन गया खतरे का समंदर

खाड़ी क्षेत्र में लगभग 18,000 भारतीय नाविक विभिन्न जहाजों पर काम कर रहे हैं. अमेरिकी प्रतिबंध और बढ़ते तनाव के बीच इन नाविकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है. परिवारों में चिंता का माहौल है और हर कोई अपने अपनों की सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहा है.