US Israel Iran War

होर्मुज में भारत-पाकिस्तान नौसेनाएं आमने-सामने! जंग के माहौल के बीच हाई अलर्ट पर दोनों देश

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू है. हालांकि इसी बीच होर्मुज के पास भारत और पाकिस्तान के जहाज को आमने सामने देखा गया है. हालांकि दोनों देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है.

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Shanu Sharma

अमेरिका और ईरान के बीच 21 अप्रैल तक सीजफायर लागू है. हालांकि इसके बाद भी इलाके में तनाव देखने को मिल रहा है. इसी बीच होर्मुज में भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के जहाज एक-दूसरे से महज 18 समुद्री मील की दूरी पर नजर आए हैं. यह नजारा दर्शाता है कि खतरा अब भी बरकरार है.

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेमियन साइमन ने सोशल मीडिया पर इस बारे में जानकारी देते हुए लिखा कि जंग के बीच दोनों देश अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हैं.

होर्मुज में अभी भी भारत के कई जहाज

मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय युद्धपोत तनावपूर्ण क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को रास्ता दिखाने का काम कर रहे हैं. अनुमान है कि अभी भी में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारत के 10 से ज्यादा व्यापारिक जहाज अटके हुए हैं. भारतीय नौसेना इन जहाजों की सुरक्षा के लिए लगातार गश्त कर रही है. पाकिस्तान की नौसेना भी अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए इसी क्षेत्र में सक्रिय है. दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों के इतने करीब होने की घटना को क्षेत्रीय विशेषज्ञ दुर्लभ और संवेदनशील मान रहे हैं. हालांकि दोनों पक्षों के बीच कोई सीधा टकराव की खबर नहीं है, लेकिन बढ़ते तनाव के बीच यह स्थिति नजर रखने लायक है. दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की तैयारियां तेज हो गई हैं. 

दोनों देशों के बीच समझौता संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक बार फिर दावा किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत में सकारात्मक प्रगति हो रही है. ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर कोई ठोस शांति समझौता होता है तो वह उस पर हस्ताक्षर करने के लिए इस्लामाबाद तक जा सकते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगर इस्लामाबाद में समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो मैं जा सकता हूं.

उन्होंने ईरान के साथ चल रही चर्चाओं को रचनात्मक बताया और उम्मीद जताई कि जल्द ही कोई सकारात्मक नतीजा सामने आएगा. तेहरान ने अमेरिका को प्रस्ताव दिया है कि वह होर्मुज में ओमान की ओर से आने-जाने वाले पोतों को बिना किसी हमले के खतरे के गुजरने देगा, लेकिन इसके बदले में ठोस समझौता और प्रतिबंधों में राहत जरूरी है. परमाणु मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच अभी भी स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई है.