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‘ये टैरिफ एक भूल है, अमेरिकी ब्रांड गर्त में हैं…’ भारत में लगाए गए शुल्क को लेकर जेक सुलिवन का बड़ा बयान

India US Tariff War: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने भारत पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ की आलोचना की.

Shilpa Srivastava

India US Tariff War: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने भारत पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ की आलोचना की. उन्होंने इसे मैसिव ट्रेड ऑफेंसिव बताया है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह कदम अमेरिका और भारत के संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे भारत को चीन के साथ संबंध मजबूत करने पर मजबूर होना पड़ सकता है. 

सुलिवन ने कहा कि कई देश अब अमेरिका को अविश्वसनीय मानते हैं, जबकि चीन वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हो रहा है. साथ ही बताया कि अमेरिका वर्षों से, रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों ही नेताओं के नेतृत्व में, भारत के साथ एक मजबूत साझेदारी बनाने के लिए काम कर रहा है. एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए यह काफी अहम था. लेकिन ट्रंप के नए टैरिफ ने तनाव पैदा कर दिया. 

अमेरिकी ब्रांड ग्लोबल लेवल पर गर्त में- सुलिवन

ट्रंप के टैरिफ से भारत को अपने हितों की रक्षा करने के लिए चीन की ओर रुख करने की जरूरत पड़ी. सुलिवन ने साफ कहा, "अमेरिकी ब्रांड ग्लोबल लेवल पर गर्त में हैं. भारत को ही देख लीजिए. ट्रंप ने उनके खिलाफ एक बड़ा व्यापारिक हमला किया है. अब, भारत सोच रहा है कि अमेरिका के खिलाफ बचाव के लिए हमें चीन के साथ बातचीत करनी होगी."

बता दें यह मुद्दा तब से उजागर हुआ है, जब से अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगाया या है. यह 27 जून से लागू हो गया है. यह अमेरिका द्वारा किसी भी देश पर लगाया गया सबसे ज्यादा टैरिफ है. इससे कपड़ा, आभूषण और मैकेनिकल डिवाइसेज जैसे भारतीय इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचने की संभावना है. इससे लोगों की नौकरियां भी जाएंगी और फाइनेंशियल डेवलपमेंट में भी गिरावट आएगी. 

सुलिवन ने तर्क देते हुए कहा कि यह टैरिफ एक भूल है, क्योंकि ये भारत के साथ एक मजबूत, दीर्घकालिक साझेदारी बनाए रखने के अमेरिका के प्रयासों को कमजोर करेगा. उनका मानना ​​है कि भारत अब अपनी अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए चीन के साथ मित्र बनने के लिए बाध्य है. इससे वैश्विक गठबंधनों का संतुलन बिगड़ सकता है और क्षेत्र में अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंच सकता है.