ईरान-भारत के बीच किन-किन चीजों का होता है व्यापार? जानें अगर वहां सरकार बदली तो किसे होगा ज्यादा नुकसान

ईरान से भारत का तेल और व्यापारिक रिश्ता गहरा है और सत्ता परिवर्तन होने पर दोनों देशों को आर्थिक असर झेलना पड़ सकता है. कच्चे तेल के अलावा भारत ईरान से कई और चीजें भी मंगवाता है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: ईरान इस समय राजनीतिक उथल पुथल के दौर से गुजर रहा है. लगातार विरोध प्रदर्शन, हिंसा और सत्ता परिवर्तन की आशंकाओं ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. ऐसे में सह सवाल उठता है कि अगर ईरान में सरकार बदलती है तो भारत को नुकसान होगा या फायदा.

भारत और ईरान के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत रहे हैं. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है. लंबे समय तक ईरान भारत के लिए कच्चे तेल का बड़ा और भरोसेमंद स्रोत रहा है. ईरान का तेल कीमत और गुणवत्ता दोनों के लिहाज से भारत के लिए अनुकूल माना जाता रहा है.

भारत ईरान से और कौन-कौन सी चीजें मंगवाता है?

कच्चे तेल के अलावा भारत ईरान से कई और चीजें भी मंगवाता है. इनमें पिस्ता, खजूर जैसे सूखे मेवे प्रमुख हैं. भारतीय बाजार में ईरानी पिस्ता और खजूर की खास पहचान है. इसके अलावा भारत ईरान से कुछ केमिकल उत्पाद, पेट्रोकेमिकल्स और कांच से बने बर्तन भी आयात करता है. त्योहारों और शादियों के मौसम में इन उत्पादों की मांग और बढ़ जाती है.

भारत ईरान को कौन-कौन सी चीजें करता है निर्यात?

वहीं भारत भी ईरान को कई जरूरी सामान निर्यात करता है. इसमें सबसे अहम बासमती चावल है. ईरान लंबे समय से भारतीय बासमती का बड़ा खरीदार रहा है. इसके अलावा भारत से ईरान को चाय, चीनी, दवाइयां, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग से जुड़े उत्पाद भेजे जाते हैं. इससे भारत के कृषि और उद्योग क्षेत्र को सीधा लाभ मिलता है.

ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल और प्राकृतिक गैस पर टिकी है. सरकारी आय का बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात से आता है. हालांकि अमेरिकी और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने ईरान के व्यापार को कई बार नुकसान पहुंचाया है.

सत्ता परिवर्तन होता है तो किसपर पड़ेगा असर?

अगर ईरान में सरकार बदलती है और नीतियों में बदलाव होता है तो सबसे बड़ा असर तेल व्यापार पर पड़ सकता है. भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं. वहीं ईरान को भी भारत जैसे बड़े खरीदार के बिना आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है. ऐसे  में अगर  सत्ता परिवर्तन होता है तो इसका असर दोनों देशों पर पड़ेगा.