'मदर ऑफ ऑल डील्स' के बेहद करीब भारत-यूरोपियन यूनियन व्यापार समझौता, दुनिया के सबसे बड़े बिजनेस फोरम में EU प्रमुख का बड़ा दावा
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने कहा है कि भारत और यूरोपीय संघ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं. यह डील वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन की दिशा बदल सकती है.
नई दिल्ली: दुनिया के बड़े आर्थिक मंच दावोस में भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों को लेकर बड़ा संकेत मिला है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोलते हुए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने कहा कि दोनों पक्ष एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते के बेहद नजदीक पहुंच चुके हैं. उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए निर्णायक मोड़ बताया और संकेत दिया कि बातचीत अब निर्णायक चरण में है.
उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता दुनिया के सबसे बड़े सौदों में से एक हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह करों के बजाय निष्पक्ष व्यापार, अलगाव के बजाय साझेदारी और शोषण के बजाय टिकाऊ विकास को बढ़ावा देगा. उनके मुताबिक यह समझौता वैश्विक सप्लाई चेन को नया आकार देगा.
दो अरब लोगों का साझा बाजार
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि इस समझौते से करीब दो अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई होगा. उन्होंने कहा कि इससे यूरोपीय कंपनियों को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शुरुआती बढ़त मिलेगी. उन्होंने इसे कुछ लोगों द्वारा कहा जा रहा “मदर ऑफ ऑल डील्स” भी बताया.
रणनीतिक साझेदारी पर जोर
अपने संबोधन में लेयेन ने भारत को इंडो पैसिफिक क्षेत्र का अहम आर्थिक केंद्र बताया. उन्होंने कहा कि यूरोप अब सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना चाहता है और नई मजबूत सप्लाई चेन बनाना चाहता है. इस रणनीति में स्वच्छ तकनीक, डिजिटल ढांचा, फार्मा और जरूरी कच्चे माल जैसे क्षेत्र अहम हैं.
भारत यात्रा से बढ़ेगी रफ्तार
लेयेन ने यह भी साफ किया कि दावोस के तुरंत बाद वह भारत की यात्रा करेंगी. यह दौरा व्यापार वार्ता को राजनीतिक स्तर पर नई गति देने वाला माना जा रहा है. इसी दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच 16वां शिखर सम्मेलन भी होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय नेतृत्व भाग लेंगे.
ऐतिहासिक समझौते की उम्मीद
भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं, लेकिन हाल के वर्षों में रिश्तों में नई तेजी आई है. अगर यह व्यापार समझौता पूरा होता है, तो इसमें टैरिफ के साथ सेवाएं, निवेश, डिजिटल व्यापार और टिकाऊ मानकों जैसे विषय शामिल होंगे. दावोस से मिले संकेतों के बाद अब उम्मीद है कि दोनों पक्ष जल्द बड़ी घोषणा कर सकते हैं.
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