डील अंतिम नहीं, ईरान ने ठीक व्यवहार नहीं किया तो फिर बम बरसाएंगे: शुक्रवार को प्रस्तावित MoU पर हस्ताक्षर से पहले बोले ट्रंप
ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौता अंतिम नहीं है और शर्तें संतोषजनक नहीं रहीं तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है.
ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित समझौते पर शुक्रवार को हस्ताक्षर होने की संभावना के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है. ट्रंप ने कहा कि अभी यह समझौता अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है और यदि उन्हें इसकी शर्तें पसंद नहीं आतीं या ईरान समझौते के अनुरूप व्यवहार नहीं करता, तो अमेरिका अपना रुख बदल सकता है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की कोशिशें जारी हैं.
समझौते को लेकर ट्रंप का स्पष्ट संकेत
जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिस्र के राष्ट्रपति के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित दस्तावेज केवल एक समझौता ज्ञापन है और इसे अंतिम नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका समझौते के परिणामों और उसके क्रियान्वयन को लेकर पूरी तरह सतर्क रहेगा. ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि ईरान की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला तो अमेरिका कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा. उनके बयान को वार्ता प्रक्रिया पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है.
उपराष्ट्रपति वेंस ने दी समझौते की जानकारी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि दोनों पक्षों ने समझौते पर डिजिटल रूप से सहमति दर्ज कर दी है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को किसी भी प्रकार की आर्थिक राहत तभी मिलेगी, जब वह समझौते के तहत तय जिम्मेदारियों का पालन करेगा. वेंस ने कहा कि अभी तक किसी वित्तीय लाभ या जमे हुए संसाधनों तक पहुंच की अनुमति नहीं दी गई है. उनका कहना था कि पूरी प्रक्रिया प्रदर्शन और अनुपालन के आधार पर आगे बढ़ेगी.
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प्रतिबंधों में राहत के लिए तय होंगी शर्तें
वेंस के अनुसार, ईरान को प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब वह संवर्धित परमाणु सामग्री के भंडार को कम करने और अंतरराष्ट्रीय सत्यापन व्यवस्था को स्वीकार करने जैसे कदम उठाएगा. अमेरिका चाहता है कि यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में परमाणु हथियार निर्माण की कोई संभावना न रहे. उन्होंने कहा कि समझौते का उद्देश्य केवल प्रतिबंध हटाना नहीं, बल्कि क्षेत्र में स्थिरता और भरोसे का माहौल बनाना भी है.
क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद उम्मीद कायम
समझौते को लेकर क्षेत्रीय परिस्थितियां भी चर्चा में हैं. इजराइल की सुरक्षा नीति और लेबनान में उसकी सैन्य मौजूदगी जैसे मुद्दे भविष्य में चुनौतियां पैदा कर सकते हैं. इसके बावजूद वेंस ने विश्वास जताया कि यह समझौता क्षेत्र के कई देशों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है. उनका कहना था कि यदि सभी पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करें तो ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिलेगा और क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में प्रगति संभव हो सकेगी.