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"मैं उसका अंत देखना चाहता हूं", लश्कर ए तैयबा के पूर्व आतंकी ने खोली हाफिज सईद के खतरनाक एजेंडे की पोल

नूर ने बताया कि "हर गुरुवार को लगभग 500 लोग देशभर से अफगानिस्तान स्थित 'मास्कर तैयबा' प्रशिक्षण शिविर में भेजे जाते थे. यह शिविर कुनार प्रांत में स्थित था." उन्होंने बताया कि "जो युवा इन इलाकों में भेजे गए थे, उनमें से कई वापस नहीं लौटे."

Gyanendra Tiwari
Courtesy: Social Media

एक चौंकाने वाले खुलासे में, जो दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से एक के अंदरूनी कामकाज को उजागर करता है, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक पूर्व सदस्य ने हाफिज सईद के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. नूर दाहरी, जो कभी लश्कर का सदस्य था, ने सईद पर पाकिस्तानियों को "राख की लड़ाई में भेजने" का आरोप लगाया, ताकि वह राज्य के राजनीतिक लक्ष्यों को पूरा कर सके. दाहरी ने कहा कि सईद के कारण पाकिस्तानियों की हजारों जानें गईं और उसने लश्कर-ए-तैयबा को 'मृत्यु का पंथ' करार दिया.

नूर दाहरी ने अपने दर्दनाक अनुभवों को साझा करते हुए कहा, "मैं याद करता हूं जब लश्कर के कमांडरों ने मुझे कायर कहकर पुकारा था, जब मैंने इस मृत्यु के पंथ को छोड़ने का निर्णय लिया था." उनके अनुसार, सईद के विचारों ने उन्हें और उनके जैसे कई युवाओं को आतंकवाद की ओर धकेला. नूर ने बताया कि उनका एक डॉक्टर बनने का सपना था, लेकिन हाफिज सईद की प्रभावशाली भाषणबाजी ने उन्हें लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ लिया. उन्होंने बताया कि "विश्वविद्यालय शिक्षा की बजाय, मैंने लश्कर में शामिल होने का निर्णय लिया, क्योंकि सईद ने मेरे उज्जवल भविष्य को बर्बाद कर दिया."

हाफिज सईद का खतरनाक प्रभाव

नूर दाहरी ने सईद के प्रभाव को और भी अधिक विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि सईद की भड़काऊ और कट्टरवादी भाषणों ने पाकिस्तान के युवाओं को इतना प्रभावित किया कि बड़ी संख्या में युवा लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गए और युद्ध क्षेत्रों में भेज दिए गए. नूर ने बताया कि "हर गुरुवार को लगभग 500 लोग देशभर से अफगानिस्तान स्थित 'मास्कर तैयबा' प्रशिक्षण शिविर में भेजे जाते थे. यह शिविर कुनार प्रांत में स्थित था." उन्होंने बताया कि "जो युवा इन इलाकों में भेजे गए थे, उनमें से कई वापस नहीं लौटे."

नूर दाहरी का टूटता विश्वास

अपने अनुभवों को साझा करते हुए, नूर दाहरी ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और हाफिज सईद के असली चेहरे को समझने में उन्हें समय लगा. उन्होंने कहा, "मुझे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में अनुभवों के बाद ही यह समझ में आया कि यह संगठन असल में एक मौत का पंथ है." उनके मुताबिक, लश्कर की असलियत का पता तब चला, जब उन्होंने अपनी आँखों से देखा कि कैसे हजारों निर्दोष लोग सईद की जहर भरी सोच का शिकार बन रहे थे. नूर ने कहा, "मैं चाहता हूं कि सईद का दीन-दुखी अंत मेरे जीवन में हो, ताकि यह सारी कुप्रभावी नीतियाँ खत्म हो सकें."

हाफिज सईद का आतंक और अंतर्राष्ट्रीय संकट

हाफिज सईद, जो प्रतिबंधित जमात-उद-दावा का प्रमुख है, 2008 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड के रूप में जाना जाता है, जिसमें 166 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई थी. सईद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भारी निंदा हुई है. भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसे मोस्ट वांटेड अपराधी के रूप में सूचीबद्ध किया है. साथ ही, अप्रैल 2012 में, अमेरिका ने मुंबई हमलों में उसकी भूमिका के लिए उस पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया था. पाकिस्तान में इस फैसले का विरोध हुआ था, जबकि भारत ने इसे पूरी तरह से समर्थन दिया.

सईद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अलकायदा और तालिबान प्रतिबंध समिति द्वारा वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया गया है और वह अमेरिकी वित्त मंत्रालय की विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादियों की सूची में भी शामिल है.