यूक्रेन युद्ध, ईरान समझौता और AI... G7 सम्मेलन में दुनिया के सामने होंगी नई चुनौतियां
फ्रांस में शुरू हो रहे जी-7 शिखर सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-ईरान शांति समझौता, वैश्विक व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विकासशील देशों के कर्ज जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे. भारत सहित कई देशों के नेता इसमें हिस्सा ले रहे हैं.
नई दिल्ली: फ्रांस में सोमवार से शुरू हो रहा जी-7 शिखर सम्मेलन इस बार कई वजहों से वैश्विक ध्यान का केंद्र बना हुआ है. अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बने शांति समझौते से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने वाली है. दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के साथ भारत समेत कई आमंत्रित देशों के प्रमुख भी सम्मेलन में शामिल होंगे. ऐसे में यह बैठक वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है.
जी-7 की शुरुआत वर्ष 1975 में वैश्विक आर्थिक संकट के दौर में हुई थी. तेल की बढ़ती कीमतों और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए छह देशों ने एक मंच तैयार किया. अगले वर्ष कनाडा के शामिल होने के बाद यह समूह जी-7 कहलाया. बाद में रूस को जोड़ा गया, लेकिन 2014 में उसे बाहर कर दिया गया और समूह फिर से जी-7 बन गया.
यूक्रेन युद्ध रहेगा केंद्र में
सम्मेलन में रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष पर विशेष चर्चा होगी. युद्ध अब पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है और पश्चिमी देश यूक्रेन के समर्थन को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करना चाहते हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी सम्मेलन में मौजूद रहेंगे. यूरोपीय देश अमेरिका के साथ मिलकर आगे की कूटनीतिक दिशा पर विचार करेंगे.
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ईरान-अमेरिका समझौते पर नजर
हाल में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम और शांति समझौते की दिशा में बनी सहमति भी सम्मेलन का बड़ा विषय होगी. जी-7 देश यह जानना चाहते हैं कि इस समझौते का वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर क्या असर पड़ेगा. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने को लेकर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
व्यापार और एआई पर मंथन
वैश्विक व्यापार असंतुलन, अमेरिकी टैरिफ नीति और चीन की आर्थिक भूमिका भी एजेंडे में शामिल हैं. इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े अवसरों और जोखिमों पर भी विस्तार से चर्चा होगी. दुनिया की प्रमुख तकनीकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी सम्मेलन में अपने विचार साझा करेंगे.
भारत समेत कई देशों की भागीदारी
जी-7 के सदस्य देशों के अलावा भारत, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, दक्षिण कोरिया और कई अन्य देशों के नेताओं को विशेष आमंत्रण दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. विकासशील देशों पर बढ़ते कर्ज, वैश्विक सहयोग और नई आर्थिक साझेदारियों पर भी नेताओं के बीच महत्वपूर्ण विचार-विमर्श होने की संभावना है.