सबसे लंबे समय तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहने से लेकर देश छोड़कर भागने तक: शेख हसीना के अर्श से फर्श तक की पूरी कहानी

शेख हसीना ने साल 2008 में जब से पीएम पद संभाला तब से लेकर आज तक वह पीएम पद पर बनीं हुई थीं. 2008 में उनकी पार्टी अवामी लीग ने विपक्ष का सफाया कर दिया था. वह बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाली नेता हैं. मार्गरेट थैचर और इंदिरा गांधी से भी ज्यादा चुनाव जीतने वालीं शेख हसीना दुनिया में सबसे लंबे समय तक सत्ता चलाने वाली महिला भी हैं.

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Bangladesh News: देश में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी बहन के साथ देश छोड़कर भारत  भाग गईं और इसी के साथ उनकी लागातार 15 साल की सत्ता का दर्दनाक अंत हो गया. अब बांग्लादेश की कमान सेना के चीफ जनरल वकर उज जमान ने संभाल ली है और उन्होंने 48 घंटे के भीतर अंतरिम सरकार के गठन का ऐलान किया है.

शेख हसीना का उभार
1947 में जन्मी 76 वर्षीय शेख हसीना जनवरी में हुए आम चुनाव में लगातार चौथी बार चुनाव जीतकर सत्ता में आईं. हालांकि, देश की सभी प्रमुख पार्टियों ने इन चुनावों का बहिष्कार किया था. चुनाव से पहले विपक्षी दलों के हजारों नेताओं को जेल में डाल दिया गया था.

शेख हसीना ने साल 2008 में जब से पीएम पद संभाला तब से लेकर आज तक वह पीएम पद पर बनीं हुई थीं. 2008 में उनकी पार्टी अवामी लीग ने विपक्ष का सफाया कर दिया था. वह बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाली नेता हैं. मार्गरेट थैचर और इंदिरा गांधी से भी ज्यादा चुनाव जीतने वालीं शेख हसीना दुनिया में सबसे लंबे समय तक सत्ता चलाने वाली महिला भी हैं.

अवामी लीग का गठन उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान ने साल 1981 में किया था. पिता की हत्या के बाद शेख हसीना ने अवामी लीक की कमान संभाल ली. साल 1996 में हसीना ने अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया को हराया और 1996 से 2001 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं.

पहले ही कार्यकाल में छाईं हसीना

उनके पहले कार्यकाल में बांग्लादेश ने आर्थिक प्रगति की. उन्होंने अर्थव्यवस्था को उदार बनाया, विदेशी निवेश को आकर्षित किया. उनसे कार्यकाल में बांग्लादेश के लोगों के जीवनस्तर में भी सुधार देखने को मिला. खालिदा जिया के कार्यकाल में बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग जमकर फला फूला और आलम ये है कि बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग का एक वैश्विक केंद्र बना हुआ है. शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उन्होंने खूब काम किया.

न्यायपालिका से तनावपूर्ण हो गए रिश्ते

हालांकि इस दौरान न्यायपालिका के साथ उनके रिश्ते तनावपूर्ण हो गए, जिसके कारण  कारण उन पर राजनीतिकरण और स्वतंत्रता के हनन के आरोप लगे. खास तौर पर इस्लामिस्ट जमात-ए-इस्लामी पार्टी के खिलाफ उनके दमन की मानवाधिकार समूहों ने भी आलोचना की.

साल 2006-08 के बीच भी शेख हसीना के पीएम रहते बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे जिसके बाद शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा था. उस समय उनका कार्यकाल सिर्फ दो ही सालों का रहा.

2009 में प्रचंड बहुमत से वापसी

2009 में हसीना ने प्रचंड बहुमत के साथ फिर से सत्ता में वापसी की. इसके बाद उन्होंने बैक टू बैक दो और विधानसभा चुनाव जीतकर देश की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. हालांकि इस दौरान उन पर चुनावों में धांधली के भी आरोप लगे.

जब कर दी गई शेख हसीना के परिवार की हत्या
1975 में बांग्लादेश के  तत्कालीन राष्ट्रपति और हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की तख्तापलट में हत्या कर दी गई. इस दौरान शेख हसीने के पिता के अलावा उनकी मां, तीन भाई और परिवार के अधिकांश सदस्यों को मार दिया गया. शेख हसीना इसलिए बच गईं क्योंकि उस वक्त वह और उनकी बहन शेख रेहाना विदेश में थे.

पिता की हत्या के बाद  हसीना और उनकी बहन रेहाना ने पश्चिम जर्मनी में बांग्लादेश के राजदूत के घर शरण ली थी, जिसके बाद उन्हें भारत में राजनीतिक शरण दी गई. हालांकि हसीना को 1981 में ही बांग्लादेश लौटने की अनुमति मिल गई थी.

हसीना को भी मारने की हुई कोशिश

साल 2004 में उनकी भी हत्या की कोशिश हुई. उनकी रैली पर ग्रेनेड से हमला हुआ था जिसमें कई लोग मारे गए थे. इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के बावजूद उनके विरोधियों ने जिया पर निरंकुशता का आरोप लगाया है और उन्हें देश के लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश के वर्तमान हालात शेख हसीना की सत्तावादी प्रवृत्ति और देश पर हर कीमत पर नियंत्रण करने की उनकी भूख का परिणाम है.