ईरान पर अमेरिका का बड़ा हमला! तेल टैंकर को बनाया निशाना, खार्ग द्वीप के पास दागीं 4 मिसाइलें
ईरान के प्रमुख तेल केंद्र खार्ग आइलैंड के पास शनिवार को कई धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबर सामने आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, धमाकों के बाद धुआं दिखाई नहीं दिया.
तेहरान: ईरान के प्रमुख तेल केंद्र खार्ग आइलैंड के पास शनिवार को कई धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबर सामने आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, धमाकों के बाद धुआं दिखाई नहीं दिया. इसके साथ ही इस घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी ईरानी अधिकारियों की ओर से नहीं की गई है. वहीं, एक तरफ यह भी दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने खार्ग आइलैंड के पास एक ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया.
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि धमाके किस वजह से हुए और क्या वास्तव में किसी टैंकर को निशाना बनाया गया था. यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच हुई है. अगर यह हमला ईरान के प्रमुख तेल केंद्र खार्ग आइलैंड पर US की तरफ से किया गया है तो तनाव और भी ज्यादा बढ़ सकता है.
US-ईरान तनाव के बीच सामने आई घटना:
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब US और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ा हुआ है. खार्ग आइलैंड को लेकर यह कथित तीसरी सैन्य कार्रवाई बताई जा रही है, जब से फरवरी में दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ. इससे पहले मार्च में अमेरिका ने खार्ग आइलैंड पर मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की जानकारी दी थी. उस समय तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया गया था. इसके बाद 7 अप्रैल को भी अमेरिकी हमले की खबर सामने आई थी.
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ईरान के लिए क्यों खास है खार्ग आइलैंड?
खार्ग आइलैंड ईरान के तट से करीब 33 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा कोरल द्वीप है. यह देश का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है और ईरान के कच्चे तेल की लगभग पूरी समुद्री खेप यहीं से बाहर भेजी जाती है. ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए तेल से होने वाली कमाई बेहद महत्वपूर्ण है. उसके तेल का बड़ा हिस्सा चीन जैसे देशों को निर्यात किया जाता है.
खार्ग पर हमला क्यों बढ़ा सकता है आर्थिक संकट?
अगर खार्ग आइलैंड के तेल ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो इसका सीधा असर ईरान के तेल निर्यात और सरकारी आय पर पड़ सकता है. इससे पहले से तनावग्रस्त क्षेत्रीय हालात और बिगड़ सकते हैं. खार्ग आइलैंड पर बड़े ऑयल स्टोरेज फैसिलिटी और रिफाइनरी के साथ हजारों कर्मचारियों के रहने की जगह भी है. यही वजह है कि इसे ईरान की सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक संपत्तियों में गिना जाता है.