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Ebola Virus Outbreak: अफ्रीका में इबोला का कहर, WHO ने घोषित की हेल्थ इमरजेंसी, भारत अलर्ट

अफ्रीका में इबोला वायरस तेजी से फैल रहा है. कांगो और युगांडा में 900 से ज्यादा केस और 223 मौतों के बाद WHO ने हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है. भारत में एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है.

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Dhiraj Kumar Dhillon

कोविड जैसी एक और महामारी दुनिया के सामने है. अफ्रीका में इबोला वायरस जमकर कहर बरपा रहा है. अब तक कांगो और युगांडा में 900 से अधिक केस सामने आ चुके हैं और इससे डरावनी बात यह है कि यह वायरस 200 से अधिक लोगों की जान भी ले चुका है. भयावह स्थिति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) इंटरनेशनल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वायरस के संक्रमण को देखते हुए भारत में हवाई अड्डों पर मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है. बाहर से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और आईसोलेट करने की व्यवस्था की गई है.

सबसे ज्यादा मामले कांगो में मिले

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इबोला वायरस के कारण अफ्रीका में अब तक 223 लोगों की जान चली गई है. सबसे ज्यादा मामले कांगो में सामने आए हैं, यहां 112 संक्रमितों और 11 की इबोला वायरस के संक्रमण से मौत की पुष्टि हुई है. कांगो के साथ लगे हुए युगांडा में भी संक्रमण चुका है, जहां 8 संक्रमित मिले हैं और एक की संक्रमण से मौत की जानकारी आई है. डब्ल्यूएचओ के मुखिया टेड रोस के मुताबिक एजेंसियां तेजी से काम रही हैं लेकिन संक्रमण तेज होने के कारण चुनौती बड़ी है.

2007 में युगांडा में मिला था 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन

डब्ल्यूएचओ के इबोला के मौजूदा स्ट्रेन की पहचान 'बुंडीबुग्यो' के रूप में की गई है. दरअसल यह स्ट्रेन पहली बार 2007 में युगांडा के बुंडीबुग्यो इलाके में मिला था. दुर्लभ स्ट्रेन होने के कारण न तो इसके लिए कोई खास वैक्सीन है और न ही इलाज. इस स्ट्रेन की मृत्यु दर 35 से 50 परसेंट तक होने की आशंका है. इसी माह कांगो के इटुरी प्रांत में पहला संक्रमण का मामला सामने आया था. लंबे समय से हिंसा और संघर्ष से प्रभावित इस इलाके में सोने की खदानों में काम करने वाले मजदूर और विस्थापित रहते हैं. इस इलाके में लोगों की आवाजाही ज्यादा होने के कारण संक्रमण तेजी से फैला. नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांत में संक्रमण के मामले सामने आए हैं, साउथ किवु के कुछ इलाके एम23 विद्रोही संगठन के कब्जे में हैं.

कांगो में सशस्त्र संघर्ष के चलते आ रहीं मुश्किलें

पूर्वी कांगो में सशस्त्र संघर्ष की वजह से हेल्थ टीमें काम नहीं कर पा रही है. अस्पतालों में हमले हो रहे हैं. पिछले सप्ताह इटुरी प्रांत के एक अस्पताल पर लगातार दो दिन तक हमले हुए और 18 इबोला संक्रमित भाग गए. जांच में यह भी सामने आया है कि संक्रमित लोगों के बीच घूम रहे हैं और संक्रमण फैला रहे हैं. कोरोना की तरह इबोला संक्रमण से मरने वालों के शव भी बेहद संक्रामक बताए गए हैं और बिना उचित प्रोटोकॉल का पालन किए अंतिम संस्कार करने पर संक्रमण तेजी से फैल सकता है.

कांगो और युगांडा से आने वाली उड़ानों पर नजर

भारत में कांगो और युगांडा से आने वाली उड़ानों पर विशेष नजर रखी जा रही है. हवाई अड्डों पर कोविड की तरह प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं. थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है और आईसोलेशन की भी व्यवस्था की गई है. इतना ही नहीं भारत सरकार ने एडवायजरी जारी कर नागरिकों को अगली सूचना तक कांगो, युगांडा और दक्षिणी सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी है. केरल सरकार ने इन देशों से आने वाले यात्रियों के ल‌िए 21 दिन का आईसोलेशन जरूरी कर दिया है. युगांडा से 23 मई को बेंगलुरु लौटी एक महिला को शरीर में दर्द की शिकायत पर आईसोलेशन में रखा गया है. हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि जांच में महिला इबोला निगेटिव मिली है.