डोनबास के बदले शांति? रूस-यूक्रेन जंग रोकने के लिए ट्रंप के नये फॉर्मूले पर विवाद, जेलेंस्की ने बताया यूरोप की सुरक्षा पर खतरा

अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए डोनबास रूस को देने और यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने का प्रस्ताव रखा है. जेलेंस्की ने इसे यूरोप की सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने एक नया फॉर्मूला सामने रखा है, जिसमें डोनबास क्षेत्र रूस को देने और बदले में यूक्रेन को मजबूत सुरक्षा गारंटी देने की बात कही गई है. इस प्रस्ताव को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि यह समझौता सिर्फ यूक्रेन ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है. इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है.

डोनबास पर अमेरिका का प्रस्ताव

अमेरिका का मानना है कि डोनबास क्षेत्र को रूस को सौंपने से युद्ध को जल्दी समाप्त किया जा सकता है. इसके बदले यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी दी जाएंगी, ताकि भविष्य में रूस दोबारा हमला न कर सके. यह प्रस्ताव हाल ही में हुई बातचीत में सामने आया है, जहां शांति स्थापित करने के लिए कई विकल्पों पर चर्चा हुई. हालांकि, इस पर अंतिम सहमति अभी नहीं बन पाई है.

जेलेंस्की की सख्त आपत्ति

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस प्रस्ताव को लेकर साफ चेतावनी दी है. उनका कहना है कि डोनबास छोड़ने से यूक्रेन की रक्षा प्रणाली कमजोर हो जाएगी. साथ ही, यूरोप की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा संतुलन का सवाल है.

रूस की रणनीति और स्थिति

रूस लंबे समय से डोनबास पर पूर्ण नियंत्रण चाहता है. हालांकि, पिछले दो वर्षों में उसकी सैन्य प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही है. यूक्रेन ने इस क्षेत्र में मजबूत किलेबंदी कर रखी है, जिससे रूस को आगे बढ़ने में कठिनाई हो रही है. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका युद्ध का सबसे अहम केंद्र बना हुआ है.

आगे की राह और चुनौतियां

जेलेंस्की का कहना है कि शांति का रास्ता केवल उच्च स्तरीय वार्ता से ही निकल सकता है. उन्होंने ट्रंप और पुतिन के साथ सीधी बातचीत की जरूरत बताई है. साथ ही, उन्होंने सुरक्षा गारंटी के वित्तपोषण और सहयोगी देशों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. फिलहाल, स्थिति जटिल बनी हुई है और किसी ठोस समझौते तक पहुंचना आसान नहीं दिख रहा.